मस्त विचार 3912
_ वरना मख़मल के बिस्तर भी चुभने लगते हैं.
_ वरना मख़मल के बिस्तर भी चुभने लगते हैं.
_ “सब कुछ” कभी भी, किसी को भी नहीं मिल सकता…
_ बल्कि उसका अर्थ यह है कि वह आपके लिए नहीं है.!!
_ उस पर नहीं जो आप के पास नहीं है.
_ जो अब है, बस यही है, इसे संभालो...
_ क्योंकि यही तो वे लोग हैं, जो यह समझतें हैं कि आप बेहतर हैं.!!
‘संभव’ शब्द को एक तरफ रख दें, और जो आपको लगता है कि संभव है उससे आगे बढ़ें.
_ मन में भी, शब्दों में भी और जीवन में भी..”
_ मासूम से लगने वाले अच्छे सुविचार मानवता पर भरोसा दिलाते हैं..!!
_ तब तक समझ नहीं आता, जिन्दगी क्या है..
_ कि पता नहीं इस खुशी की कौन सी क़ीमत चुकानी पड़ेगी.