मस्त विचार 3913
….इसलिए धागे को लपेटकर और जुबान को समेटकर ही रखना चाहिए.
_ करने दो जो बकवास करते हैं, खाली बर्तन ही आवाज़ करते हैं.
_ पढ़ा-लिखा इंसान ज्यादा तू-तू मैं-मैं नहीं करता.!!
….इसलिए धागे को लपेटकर और जुबान को समेटकर ही रखना चाहिए.
_ करने दो जो बकवास करते हैं, खाली बर्तन ही आवाज़ करते हैं.
_ पढ़ा-लिखा इंसान ज्यादा तू-तू मैं-मैं नहीं करता.!!
*जो “प्रतिशोध” के बजाय* *”परिवर्तन” की सोच रखते है…!!!
_ वरना मख़मल के बिस्तर भी चुभने लगते हैं.
_ “सब कुछ” कभी भी, किसी को भी नहीं मिल सकता…
_ बल्कि उसका अर्थ यह है कि वह आपके लिए नहीं है.!!
_ उस पर नहीं जो आप के पास नहीं है.
_ जो अब है, बस यही है, इसे संभालो...
_ क्योंकि यही तो वे लोग हैं, जो यह समझतें हैं कि आप बेहतर हैं.!!
‘संभव’ शब्द को एक तरफ रख दें, और जो आपको लगता है कि संभव है उससे आगे बढ़ें.
_ मन में भी, शब्दों में भी और जीवन में भी..”
_ मासूम से लगने वाले अच्छे सुविचार मानवता पर भरोसा दिलाते हैं..!!
_ तब तक समझ नहीं आता, जिन्दगी क्या है..