सुविचार 4736
दूसरों को दुख और पीड़ा देने के विचार यदि हमारे मन में हैं तो अनजाने में हम स्वयं के लिए ही दुख और पीड़ा के बीज बो रहे हैं।
यही बीज आगे वृक्ष बनकर हमारे संचित कर्मों में जुड़ जाएंगे जिनका फल हमें भोगना ही होगा।
यही बीज आगे वृक्ष बनकर हमारे संचित कर्मों में जुड़ जाएंगे जिनका फल हमें भोगना ही होगा।
अपने लक्ष्यों के प्रति आक्रामक रहें, अपने लायक से कम कुछ भी स्वीकार न करें.
हम उन्हें जाने से नहीं रोक सकते…!!
मै जैसा था फिर मुझे वैसा कर दो ।।
एवंम किसी को मुझसे कोई उम्मीद रखने की सलाह भी नहीं देता…!!
कि कभी दख़ल न कर सकूँ तेरी रजा में..
_ तुम देर से मिले….. इतना नुकसान ही काफी है..!!