सुविचार 3532
_ जितना वा जो कुछ बचा, समझो वही विशेष।
_ जितना वा जो कुछ बचा, समझो वही विशेष।
_ वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली।।
_ यहाँ हर सुख के साथ दुःख जुड़ा है.
_ इंसान को देखना नहीं बस समझना सीखो.
_ ज़िंदगी एक ‘ खेल ‘ है इसे ‘ खेलना ‘ ज़रूरी है.
सफ़लता-विफ़लता तो एकमात्र उदाहरण हैं ज़िंदगी का।
सफ़लता सिखाती है कि तुझे और ऊँचाईयों को है छूना।
विफ़लता सिखाती है गिर कर उठना और उठ कर संभलना
और ज़िंदगी में और अधिक बेहतर कार्य हैं तुझको करना।
बस तुझे है चलते रहना।
तू चल, मिठे लगेंगे ज़िंदगी के कड़वे पल
बस तू चल।..
_ संतुष्टि बहुत बड़ी चीज है _ यही प्राप्त करने की कोशिश करना चाहिए.
_ जिनमें स्वाभिमान गिरवी न रखना पड़े..!!
_ उसके जैसा कोई दूसरा व्यक्ति पैदा ही नहीं हुआ.