सुविचार 3267
“शब्दों की ताक़त को कम नहीं आँकिये.. साहब _ क्योंकि “छोटा सा – हाँ
और छोटा सा – ना” _ पूरी ज़िंदगी बदल देता है.”
और छोटा सा – ना” _ पूरी ज़िंदगी बदल देता है.”
जरुरी है हर किरदार कुछ नया सिखाए.
हम इसी वास्ते हर शख्स से कम मिलते हैं.
उसके आंसू आपके लिए सजा बन सकते हैं.
सीख मिल रही है हर किसी की ओर से…
कुछ भी उम्मीद न करें और सब कुछ स्वीकार करें और आप कभी निराश नहीं होंगे.
मैं आपको बताना चाहता हूं, नफरत एक छूत का रोग नहीं है, _ अपने नफरत के वीरो को अकेले भुगतो और मुझे शामिल मत करो.
और जो खुद से प्यार करना जानता है, _ वो इंसान कभी हालातों से हार नही सकता..