सुविचार 3248
जब तक कि आप ख़ुद से ख़ुश होना नहीं चाहें.
जब तक कि आप ख़ुद से ख़ुश होना नहीं चाहें.
वो एक कतरा भी, फिर समुन्दर है…
_ पर हर कोई कहता कि ‘हम ठीक हैं’
और उठा लोगे तो एकदम हलकी हो जायेगी..
समस्या तो होती है, लेकिन समाधान भी साथ होता है,”
वरना ज़ख्म इतने हैं की ठीक से रोया भी नहीं जाता.
बाद में तो वही मिलेगा _ जो बीज बोया था..
इन छोटी छोटी बातों से हार जाऊं वो इंसान नहीं हूं मैं.
अपने अतीत की परछाइयों को अपने भविष्य के द्वार पर अँधेरा न करने दें, क्षमा करें और जाने दें.
लोग खामोश होते हैं पर नासमझ नहीं…!!
लेकिन लोग ये नहीं जानते की टूटने के बाद ही वो व्यक्ति इतना मजबूत हो पाया है.