Collection of Thought 738
हो सकता है कि आपका जीवन आपके होठों से अधिक जोर से प्रचार करे.
हो सकता है कि आपका जीवन आपके होठों से अधिक जोर से प्रचार करे.
हर कोई अपनी तकदीर और अपनी हक़ीकत बनाने में लगा है.
अपनी रजा में अब तू रहना सीखा दे,
शिकायत ना हो कभी भी किसी से,
सुख और दुख के पार जीना सीखा दे..
इंसान बनना भूल जाते हैं..!
तेरी संगत में खुद को,,,,,,,झुकाना सीख गए,
पहले मायूस हो जाते थे,,,,,,,कुछ ना मिलने पर,
अब तेरी रज़ा में,,,,,,राज़ी रहना सीख गए,,,,!!
ऐसे में अपना भला कैसे हो सकता है..??
कभी खुदा की रजा समझ कर…
कभी अपने गुनाहों की सजा समझ कर.
कौन छूता है इस जमीन को, आसमान से टूट कर…
_पर वह उसका उपयोग से ज्यादा दुरूपयोग करता है.!!
वो किसी की परछाई बनने में नहीं !!