सुविचार 2811
की जब तक साँसे चलती है कन्धा कोई नहीं देता.
की जब तक साँसे चलती है कन्धा कोई नहीं देता.
वफादार तो हमेशा तन्हां ही मिलते हैं…
और तकलीफ ना हो तो, घबराहट शुरू हो जाती है.
उसने एक छोटी भूल की..
और हमने वो याद रखकर बड़ी भूल की..!
वो जीत दो कोड़ी की हो जाती है, जो इंसानियत हार के हासिल होती हो.
मैने डुबो के कश्ती अपनी… तू़फां की लाज रख ली…
दर्द उन्हें भी होता है.
बाँकी सब ठीक है ठीक ही रहेगा.
कुछ अज्ञानता की कीमत के अलावा एक व्यक्ति कभी खुश नहीं होता है.