मस्त विचार 2608
जहाँ मंजिले होगी अपनी.* कोई तो ऐसी ज़मीं होगी..*****
जहाँ मंजिले होगी अपनी.* कोई तो ऐसी ज़मीं होगी..*****
ना कोई आगे चलता है और ना कोई पीछे छूटता है !
*कभी हम समझ नहीं पाते हैं* *और कभी समझा नहीं पाते हैं…!*
तेरे लिए तू सही, मेरे लिए मैं सही..
_ क्योंकि किसी भी स्थिति में हम केवल एक ही निर्णय ले सकते हैं; हमें विभिन्न निर्णयों की तुलना करने के लिए दूसरा, तीसरा या चौथा जीवन नहीं दिया गया है.
अपनों को अपना बनाये रखना सबसे मुश्किल काम है.
_दूसरों को अपना बनाना अब खत्म होता जा रहा है..!!
जो कहते हैं, और जो करते हैं. सामंजस्य में हो.
मेरी परवारिश ही दर्द ने की है.