सुविचार 4647
लोगों की बातों से क्यों परेशान होते हो, लोग तो कुछ भी बोल कर निकल जाते हैं ;
जब हालात बदलते हैं, तो लोगों के बोल बदल जाते हैं.
जब हालात बदलते हैं, तो लोगों के बोल बदल जाते हैं.
ये उस कांच के समान होती हैं जो लोगों को चुभती बहुत है.
_ हालात कैसे भी हों, किसी के सामने झुकना नहीं..
कि कितना दर्द होता है_ _नजरअंदाज करने से..
फिर भी दुआ में उसने बरसात मांगी ”
बल्कि, आपको गलत साबित करने में अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं.
अपने आप को अपने शरीर से परिभाषित न करें .. यह अनंत है जो ब्रह्मांड में हर चीज से जुड़ा है.
अकेलेपन का मतलब ये है की आपकी परवाह करने वाला कोई नहीं.