सुविचार 2735
माफ करना और शांत रहना सीखो,
ऐसी ताकत बन जाओगे कि पहाड़ भी रास्ता देंगे.
ऐसी ताकत बन जाओगे कि पहाड़ भी रास्ता देंगे.
*ठोकर* *इसलिए लगती है कि* *इंसान आगे संभल जाये.
और उससे भी बहुत कम है जो मुझे समझ पाते हैं.
जहाँ मंजिले होगी अपनी.* कोई तो ऐसी ज़मीं होगी..*****
ना कोई आगे चलता है और ना कोई पीछे छूटता है !
*कभी हम समझ नहीं पाते हैं* *और कभी समझा नहीं पाते हैं…!*
तेरे लिए तू सही, मेरे लिए मैं सही..
_ क्योंकि किसी भी स्थिति में हम केवल एक ही निर्णय ले सकते हैं; हमें विभिन्न निर्णयों की तुलना करने के लिए दूसरा, तीसरा या चौथा जीवन नहीं दिया गया है.