मस्त विचार 4638
निखरती है मुसीबतों से ही शख्सियत यारों,
जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का..
जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का..
_ बस जो अनावश्यक था, उसे गिरने दिया..- और उसी में हल्कापन मिला.”
_ जो छोड़ना सीख गया, वही नए साल को सच में जी पाता है.
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है..!!
तय करें कि आप क्या चाहते हैं .. विश्वास करें कि आप इसे प्राप्त कर सकते हैं, विश्वास करें कि आप इसके लायक हैं, विश्वास करें कि यह आपके लिए संभव है.
लोग बात को पकड़कर इंसान को छोड़ देते हैं !
वर्ना उसको अपनी मंज़िल का पता नहीं मिलता..