मस्त विचार 2387
“मेरी नज़र” किताबो पर कभी गई ही नही.
“मेरी नज़र” किताबो पर कभी गई ही नही.
अन्धकार से लड़ते रहे तो सवेरा जरुर खिलेगा.
जब ठान लिया मंजिल पर जाना तो रास्ता जरुर मिलेगा.
ए राही न थक, चल. एक दिन समय जरुर फिरेगा…
उदास कर के मुझे खुद भी खुश नहीं रहता.
उम्मीदों से ही घायल है और उम्मीदों पर ही जिंदा है…!
_जो गिर कर फिर से उड़ चला वही जिंदा है.!!
जिंदगी में जगह उसे दो _ जो कमियां देख कर भी _ साथ ना छोड़े..
“ये ठीक नहीं”
जहाँ रस होता है, वहाँ गाँठ नहीं होती
बस जीवन भी ऐसा ही है
यदि मन में किसी के लिये नफरत की गाँठ होगी तो
हमारा जीवन भी बिना रस का बन जायेगा…..
और जीवन का रस बनाये रखना हो
तो नफरत की गाँठ को निकालना ही होगा…..
जानिए और समझें कि चुनौतियां और कठिन समय होगा,_ उनसे बचने की कोशिश न करें, बल्कि उन्हें आपको एक बेहतर इंसान के रूप में ढालने दें.
कहीं देखा है शायद आपको, इतना कहकर बस हाथ जरूर मिला लेना!