सुविचार 4610
हमारी संपत्ति के कई उत्तराधिकारी हो सकते हैं,
लेकिन हमारे कर्मों के सिर्फ़ हम ही उत्तराधिकारी हैं.
लेकिन हमारे कर्मों के सिर्फ़ हम ही उत्तराधिकारी हैं.
जियो उसके लिए जो तुम्हारी दुनिया खूबसूरत बनाये !!!
या कहीं और सिलसिले मजबूत हो गए हैं..।।
पर एक शख्स है नासमझ मुझे बेहतरीन कहता है.
उसी को इस संसार में रहने का ढंग आ गया …
” जब भीतर कोई दुश्मन नहीं है, तो बाहर के दुश्मन आपको चोट नहीं पहुंचा सकते ”
जिंदगी गुज़ारने के दो ही तरीके है, एक तुझे नहीं आता … एक मुझे नहीं आता … !
बल्कि वो उम्मीदें धोखा दे जाती है, जो दूसरों से रखते हैं.
मिला साथ धागे का फितरत ही बदल गयी.