सुविचार 2029
इस “आरंभ और अंत” के बीच का समय भरपूर हास्य भरा हो.
..बस यही सच्चा जीवन है.
इस “आरंभ और अंत” के बीच का समय भरपूर हास्य भरा हो.
..बस यही सच्चा जीवन है.
अनमोल है हर सांस, जो हमें रब ने दी हुई है.
पाकर खोने का अब, ग़म मत कर ए मेरे दोस्त,
किस्मत बुरी या भली, ये कर्मो ने लिखी हुयी है.
मनुष्य जैसी संगति करता है, जैसे वातावरण और माहौल में रहता है, जैसे विचार करता है, जैसा जैसे विचार सुनता है वैसे ही संकल्प करने लगता है, वैसा ही आचरण करने लगता है और जैसा आचरण करता है, फिर वैसा ही उसका रूप और स्वभाव बन जाता है. जिन बातों का बार-बार विचार करता है, धीरे-धीरे वैसी ही इच्छा हो जाती है, फिर उसी के अनुसार वार्ता, आचरण, कर्म और गति होती है.
उनको जीवन भर दूसरों की थाली की केवल झूठन ही मिलती है..
चलने की जिद्द भी जरुरी है मंजिलों को पाने के लिए..
हर सुबह मुस्कान के साथ स्वागत करें, _ नए दिन को अपने निर्माता की ओर से एक और विशेष उपहार के रूप में देखें, एक और सुनहरा अवसर.
जो सारी कायनात का मालिक है.
ये तो वो जाने या मैं जानू,
जिसने महसूस किया, उसने ही उसे जाना है.
तो वो नफरत का नही दया का पात्र होता है,
क्योंकि कोई भी समझदार इंसान कभी किसी को दुख नही दे सकता.
हम क्यों किसी के बारे में बुरा सोच कर अपना “वक्त” और “कर्म” खराब करें..
जो दूसरों से उम्मीद नहीं रखते हैं,
उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं होती है.