Collection of Thought 605
ऐसा नहीं है कि मैं इतना होशियार हूं, बस इतना है कि मैं समस्याओं के साथ अधिक समय तक रहता हूं.
ऐसा नहीं है कि मैं इतना होशियार हूं, बस इतना है कि मैं समस्याओं के साथ अधिक समय तक रहता हूं.
ऐ ‘ज़िन्दगी’ इसके सिवा कुछ ना दिया तूने….!!
पल पल घुमड़ता, आँखों में समन्दर है,
जाने किसको उडगति ये अँखियाँ,
किसी पर क्यों आस लगाये बैठी है।
वो रेत को रौंदता नीर की तलाश में,
अडिग, अदम्य, अदभुत साहस,
आँखों मे झील सी गहराई, लक्ष्य भेदती,
हार कर छोड़ देना या लड़ कर पराजित होना,
बस सीख और ग्लानि का अन्तर है ।
करम लिखेंगे माथे की लकीरें ।
क्यों संताप करें क्यों विलाप करें,
सूरज की रोशनी में नहीँ,
अँधेरे में ही दीपक जलता है ।
जो चट्टानों सी मुसीबत में, लहरों से टकराता है,
वो लहरें जिसने डुबाई कश्तियाँ कई,
आकर किनारे पर, पैरों को चूमती है ।
इस जज्बे को, सागर भी फिर पथ देता है,
तेरी हिम्मत, तेरा साहस,
फिर लिखी तकदीर बदल देता है,
पग पग, पल पल, बल देता है,
मायूसियों को खुशियों का मंजर देता है ।
।। पीके ।।
ज़िन्दगी फिर से लिखने का मन करता है कभी-कभी।..
हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की.
स्वयं के बचाव के लिए कभी दूसरों पर दोषारोपण न करें और न ही कभी झूठे तथ्यों का सहारा लें, क्यूंकि समय के पास सत्य को प्रकट करने का अपना ही तरीका होता है !!!
आदमी लंबाई- चौड़ाई के हिसाब से छोटा नहीं होता, वरन जिस आदमी के मानसिक स्तर की ऊंचाई कम है, वह आदमी ऊंचे सिद्धांत और ऊंचे आदर्शों को नहीं सुन सकता.