सुविचार 1951
हर बात को ध्यानपूर्वक मन लगाकर सुनना चाहिए, सुनने के बाद यदि जरुरी हो तो गुनना याने उस पर विचार करना चाहिए जब अच्छी तरह समझ आ जाए तब उत्तर देना चाहिए, यदि आप ऐसा करते है तो यकीं मानिये आप कई समस्याओं और विवादों से बच जायेंगे !!!
हर बात को ध्यानपूर्वक मन लगाकर सुनना चाहिए, सुनने के बाद यदि जरुरी हो तो गुनना याने उस पर विचार करना चाहिए जब अच्छी तरह समझ आ जाए तब उत्तर देना चाहिए, यदि आप ऐसा करते है तो यकीं मानिये आप कई समस्याओं और विवादों से बच जायेंगे !!!
मनाते जो नहीं हो तो सताते क्यों नही हो तुम.
कोई बात तत्काल उसी समय समझ में आ जाती है, कोई कुछ घंटो में समझ आती है, कुछ को कुछ दिन, किसी बात को कुछ महीने और साल लग जाते हैं, कुछ बात दुसरे के दृष्टी कोण से सही होने पर भी हमें समझ नहीं आती, अतः बहस बहुत विचार कर करें और किसी बात को प्रतिष्ठा का प्रश्न कभी न बनायें !!
मिला तो रब भी नहीं, पर इबादत कहाँ रुकी हमसे..
खुदा ने हमें दो उपहार दिये:- एक अच्छा जीवन जीने का विकल्प, और इसे सर्वश्रेष्ठ बनाने का मौका.
“भवनो” से नही “भावना” से महान बनता है.
“उच्चारण” से नही “उच्च – आचरण” से महान बनता है….
बदल गए हैं वो लोग जो सुबह शाम हाल पूछा करते थे.
; जबकि होना ये चाहिए कि हँसी अपने भीतर से आनी चाहिए..
कमजोरों से तो लोग सहानुभूति रखते हैं.
अगर ये सच है तो अपनी किस्मत में दर्द कौन लिखता है !!