सुविचार 4596
अपने मन की किताब ऐसे व्यक्ति के पास ही खोलना,
जो पढ़ने के बाद आपको समझ सके.
जो पढ़ने के बाद आपको समझ सके.
जिंदगी को अपनों से जोड़ लो, है चार दिन की ये सोच लो..
उन्हें नहीं जो चेहरे पर शिकन पैदा करे.
*चादर बड़ी करें या,* *ख़्वाहिशे दफ़न करें !*
” मैं खुद को और कितना बदल सकता हूँ ताकि मेरा काम अधिक प्रभावी हो जाए ? “
पहले मुड़ कर देखते थे..,अब देख कर मुड़ जाते हैं ।
जीवन कड़वा है, लेकिन आपके पास इसे कड़वा रहने या इसे मीठा करने की शक्ति है.
इसीलिए बाकी नहीं, अब कोई भी आस.
बेहतर की तलाश में बेहतरीन को खो देता है.