सुविचार – 1428
जीवन में भले ही विश्राम न हो, किन्तु आनन्द अवश्य होना चाहिए.
आने वाले कल के लिए हमें अपना आज का आनन्द नहीं खोना चाहिए,
_क्या पता कल आए या न आए और आए भी तो उसी रूप में न आए, जिस रूप में हम सोच बैठे हैं.
खाते हैं तो पचता नहीं, कमाते हैं तो बचता नहीं.
मददगार रहें, _ जब आप किसी व्यक्ति को बिना मुस्कान के देखते हैं, तो उसे अपनी मुस्कान दें.
तुम बढ़ते जाना…….
किसी शख्स के जख्म पर मरहम किया है, यदि तूने तो, खुदा की बंदगी की है.
_ उसके पास से उसका सब समेट कर.. उसे बिल्कुल असहाय छोड़ के चल देता है..!!