मस्त विचार 4301
हजार ग़म मेरी फ़ितरत नहीं बदल सकते.. क्या करू मुझे आदत मुस्कुराने की है..!!
ये ना होता तो कोई दूसरा ग़म होना था..
_ मैं तो वो हूँ.. जिसे हर हाल में बस रोना था..!!
_ मैं तो वो हूँ.. जिसे हर हाल में बस रोना था..!!
ये तो तुमारी नज़रो का जाम है, कही मिलता नहीं..।।”
_ परेशान वो हैं जो…दूसरों का मूल्यांकन करते हैं…!!
भय, लालच, क्रोध, कड़वाहट, जैसे नकारात्मक भाव प्रसन्नता का भाव कम कर देते हैं.!!
ग़िला भी कर सके उससे अब इतना भी हक़ ना रहा।”
रोज रात सोने से पहले एक बार सोचना चाहिए.
_ सुबह ज़रूर आएगी तो सुबह का इंतज़ार कर..
पास अगर हो तो ,,,,,,अहसास कहाँ होता है !!
प्रगति करने के लिए आज कल साधन सम्पदा बहुत हैं लेकिन लोगों में धैर्य नहीं है !