मस्त विचार 1332

गलतफहमियों के सिलसिले इतने दिलचस्प होते हैं कि….

हर ईंट सोचती है, दीवार मुझ पर टिकी है.

सुविचार 1405

सही समय पर उचित कार्य करने की आदत आपके दुर्भाग्य को भी सौभाग्य में बदल देगी.

सुविचार 1404

उत्तम पुरुषों की संपत्ति का मुख्य प्रयोजन यही है कि औरों की विपत्ति का नाश हो.

मस्त विचार 1330

किसी से डरते क्यों हो ?

दबा के मन की बात, मौन तुम धरते क्यों हो ?

शरीर में मुहं में जिह्वा, खुल कर अपनी बात कहो.

मरने पर चुप रहना, जिन्दा मरते क्यों हो ?

अरे, भले तुम से तो “मूर्ख” ही लगते हैं.

भले निरर्थक सही, मगर कुछ कहते हैं.

तुम सुशिछित होकर, भला हिचकते क्यों हो ?

चलो होंठ खोलो, अब यह संकोच हटाओ.

बोल उठो, मृदु बोलो, सफल तुम भी कहलाओ.

उठो, भरो हुंकार, समर से हटते क्यों हो ?

किसी से डरते क्यों हो ?

मस्त विचार 1329

इंसान पूरी जिंदगी वह करने में बिता देता है जो हो नहीं सकता “दूसरों को बदलना”

पर वह नहीं करता जो हो सकता है “खुद को बदलना”..

सुविचार 1402

आप चाहो जितना पवित्र शब्दों को पढ़ो या बोलो लेकिन जब तक आप उनको जीवन में अमल ना करो तब तक सब बेकार है.

Collection of Thought 422

The world will provide you with stones every day; what you build out of it is you outlook- A bridge or a wall.

संसार आप को प्रतिदिन पत्थर देगा; आप इससे जो निर्माण करते हैं, वह आपका दृष्टिकोण है – एक पुल या एक दीवार.

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