Collection of Thought 294

Make use of every moment of life to get more and more knowledge.

अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए जीवन के प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करें.

सुविचार 1239

जिन्दगी को बने- बनाये ढ़र्रे पर तो हर कोई जी लेता है, लेकिन कुछ लोग ऎसे होते हैं, जिन पर औरों से हटकर जीने और जहाँ को जीतने का जूनून सवार होता है- ऎसे लोग अपनी जिद के साथ कुछ ऎसी मिसाल कायम कर जातें हैं- जो सदा के लिए किस्सो- कहानियों में तब्दील हो जाती है.

सुविचार 1238

आगे बढ़ो, आगे बढ़ो – जैसे- जैसे आप आगे बढ़ोगे, आपकी कठिनाईयाँ अपने आप दूर होती चली जाएँगीं. आप देखोगे कि उन कठिनाइयों के बीच में से ही प्रकाश उदित होता है, ऎसे ही आपका मार्ग जगमगाएगा. 

Collection of Thought 293

Thoughtful people hope for the best but are also ready for the worst.

विचारशील लोग अच्छे की उम्मीद करते हैं लेकिन बुरे के लिए भी तैयार रहते हैं.

सुविचार 1237

अगर दुनिया में सिर्फ खुशियाँ ही खुशियाँ होती तो, हम कभी बहादुर या धैर्यवान बनना नहीं सीख़ पाते.

Collection of Thought 292

Spread love everywhere you go. Let no one ever come to you without leaving happier.

आप जहां भी जाएं प्यार फैलाएं, _ किसी को भी खुश किए बिना अपने पास से न जाने दें.

मस्त विचार – प्रेम के गीत हैं गाते – 1175

प्रेम नगर के हम हैं पंछी, प्रेम के गीत हैं गाते.

_ ना कोई बस्ती मकान अपना, खुले गगन मंडराते.
_ ध्यान गंगा का जल हैं पीते, ज्ञान के गीत हैं गाते.
_ सुख- दुख खाली जाल बिछावे, अब नहीं धोखा खाते.
_ तेरी कृपा से सीखा हमने, मस्ती में पंख फैलाते.
_ प्रेम नगर के हम हैं पंछी, प्रेम के गीत हैं गाते.!!
ध्यान अनुभव – “प्रेम नगर का पंछी”

_ आज ध्यान की अवस्था में जैसे मैं एक सीमाओं से परे खुले आकाश का पंछी बन गया.
_ ना कोई नाम, ना पहचान — सिर्फ प्रेम की लहरें थीं जो मुझे अपने भीतर समेट रही थीं.
_ मैंने अनुभव किया कि यह जीवन एक बंधन नहीं,
_ एक अवसर है —प्रेम को जीने का, अनुभव करने का, और उड़ान भरने का.
_ ध्यान गंगा के निर्मल जल ने मेरे अंतर को धो दिया.
_ मस्तिष्क की हलचलें शांति में विलीन हो गईं.
_ एक निर्मल चेतना का स्पर्श था,
_ जहाँ न कोई डर था, न कोई इच्छा —
बस “मैं” और “वह” एक हो गए.
_ इस प्रेम नगर में… सुख-दुख अब बस दृश्य बनकर रह गए,
_ जैसे बादल आते हैं और चले जाते हैं,
परन्तु आकाश — सदा शांत, सदा निर्मल.
_ तेरी कृपा से सीखा — कैसे पंख फैलाकर उड़ना है, बिना डरे, बिना थके..
— बस प्रेम के गीत गाते हुए, मुक्त गगन में विचरते हुए.
_ मैं अब जानता हूँ —
_ मैं इस प्रेम नगर का एक पंछी हूँ,
_ जहाँ घर नहीं, लेकिन अपनापन है,
_ जहाँ उड़ान है, लेकिन प्रयास नहीं,
_ जहाँ प्रेम है, और केवल प्रेम है.
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