मस्त विचार 4268
जिस ख़ुशी की तलाश में ताह उमर भटकते रहे दरबदर,
वो ख़ुशी दफ़न थी कहीं हमारे ही अंदर..
वो ख़ुशी दफ़न थी कहीं हमारे ही अंदर..
जिन्होंने प्रशंसा और निंदा में एक जैसा रहना सीख लिया हो !!
क्या हमको भी उन आँखों ने ढूंढा होगा..
एक ऐसी पहेली है, जो ज़िंदगी कहाती है,”
आप या तो अभी खुश होना चुन रहे हैं या आप खुश न होने का बहाना बना रहे हैं.
जो थोड़ा है उसी में खुश रहो. कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके पास कुछ नहीं है फिर भी वे मुस्कुराने में कामयाब हो जाते हैं.
जो बोया है वो निकलना तय है..