सुविचार 1156
अपने विचारों को सहज भाव से अभिव्यक्त करने की और दूसरों के विचार शान्ति पूर्वक और सह्रदयता से सुनने की आदत डालें.
सुधार बहुत करता है, लेकिन प्रोत्साहन अधिक करता है.
दर्द जब मुझको ही सहना है तो तमाशा क्यों करना.
इसीलिए नहीं कि वो माफ़ी के लायक हैं..,
पर ये आपके अपने मन की *शान्ति* के लिए ज़रूरी है.
आप अपने लिए जो कर सकते हैं उसके लिए कभी भी दूसरे को परेशान न करें.
ज़िंदगी मेरी है तो फिर मर्जी तेरी क्यूँ..
न्याय अकेले एक पक्ष के लिए नहीं हो सकता, बल्कि दोनों के लिए होना चाहिए.
रास्ता खुद ब खुद दिखाती है !!!