मस्त विचार 4478
_ कभी आँखें, कभी साँसे, हकीकत बोलती हैं !
_ कभी आँखें, कभी साँसे, हकीकत बोलती हैं !
जौहरियों की जब जब भी कमी हो जाती है.
_ कुछ नीम के पेड़ भी होते हैं जो सुगन्धित तो नहीं करते पर काम बहुत आते हैं.
_ जबकि बांस हवा के साथ मुड़ कर बच जाते हैं.!!
_ अच्छाई और बुराई हमारे कर्म पर निर्भर है, वही बांस किसी के लिए तीर बन जाता है और किसी के लिए बांसुरी.!!!
” हमारा ज्ञान अज्ञान के एक महान महासागर में एक छोटा सा द्वीप है “
अच्छी से अच्छी बात का भी गलत ही मतलब निकालते हैं.
बहुत बेदर्द बैठे हैं दुनिया में जाल बिछाने वाले.
पर दर्द जगाता भी है,,,ये सब नहीं जानते,,,
जो कहना है मगर कह नहीं सकते, वो मर्यादा है.
आप मुझसे सीखिए कि जिन्दा रहकर हर ग़म को कैसे पीते हैं.
आपकी बर्बादी का कारण बनता है.