सुविचार 4367
उसकी नजरों में आपका कोई महत्व ही नहीं है.
उसकी नजरों में आपका कोई महत्व ही नहीं है.
समझ लें हमारा खानदान बरबाद हो चुका है.
किसी की दुनिया उजड़ जाती है तो किसी की दुनिया संवर जाती है.
एक दिन आपका जीवन आपकी आंखों के सामने से होकर गुजर जाएगा. सुनिश्चित करें कि यह देखने लायक हो.
जीवन बहुत, बहुत छोटा है, और आप इसे अपनी इच्छानुसार जीना चुन सकते हैं. आप अपने आप को शांत करना और अपने आप को अभिव्यक्त न करना चुन सकते हैं ताकि आप इसमें फिट हो सकें, ताकि लोग आपको नापसंद न करें.
हम बस इतना करना चाहते हैं कि किसी को वह बनने के लिए प्रेरित करें जो वह बनना चाहते हैं और उन्हें थोड़ी आशा दें.
आप बस अपनी अंतःप्रेरणा के साथ चलें, क्योंकि आपकी आंत आपके हृदय से अधिक बुद्धिमान है.
किसी भी चीज़ के लिए खुद को चोट पहुँचाने लायक नहीं है. आपके जीवन पर कब्ज़ा करने लायक कुछ भी नहीं है, क्या आप समझते हैं ?
खुश रहने का मतलब यह नहीं है कि सब कुछ परफेक्ट है. इसका मतलब है कि आपने खामियों से परे देखने का फैसला कर लिया है.
क्या आप किसी उत्तम चीज़ को सुंदर बनाने के लिए उसे नष्ट कर देंगे ?
चाहे आप कितनी भी कोशिश कर लें और अपने परिवेश को रचनात्मकता के लिए उपयुक्त बना लें, अगर आपके अंदर का वातावरण रचनात्मक रूप से स्वस्थ नहीं है तो आप वह कला नहीं बना पाएंगे जो आप चाहते हैं. अपने और अपने आंतरिक सत्य के साथ तालमेल बिठाना, वहां शांति से रहना, अपनी रचनात्मकता को विकसित करने का सबसे अच्छा तरीका है. तब आप ख़राब माहौल को भी अच्छा बना सकते हैं.
वास्तव में ऐसे बहुत से लोग हैं जो दैनिक आधार पर आप पर नियंत्रण पाने और किसी तरह से आपकी आत्मा को चुराने, आपका एक हिस्सा लेने की कोशिश कर रहे हैं…
किसी चीज़ से बहुत ज़्यादा प्यार करना ठीक है, जब तक कि वह आपके लिए वास्तविक हो.
आँसू ऐसे शब्द हैं जिन्हें हृदय व्यक्त नहीं कर सकता.
असली बदला अपने आप को कुछ बनाना है.
सबसे स्पष्ट कार्य सत्य से आते हैं, दायित्व से नहीं.
अलग होना ठीक है.
जब आप विश्वास करते हैं तो आप अद्भुत चीजें कर सकते हैं.
हमें यह करना ही होगा, इसलिए परेशान होने का कोई मतलब नहीं है.
यदि आप कभी किसी अंधेरी जगह पर हों तो हिंसा का सहारा न लें. किसी से बात करो; चाहे वह चिकित्सक हो, शिक्षक हो, माता-पिता हो, या कोई ऐसा व्यक्ति जिस पर आप भरोसा कर सकते हैं. हम सभी के अपने अंधेरे स्थान हैं और यह महत्वपूर्ण है कि आपको सहायता मिले.
आपकी सारी विचित्रताएँ और आपकी सारी समस्याएँ – यहाँ तक कि आपके अवसाद और आपकी असफलताएँ – यही आपको आप बनाती हैं.
कभी-कभी आपको अपनी राख से उठने, खुद पर विश्वास करने, खुद से प्यार करने और एक नया इंसान बनने के लिए अंदर ही अंदर मरना पड़ता है.
मैं इस बात का जीता-जागता सबूत हूं कि जिंदगी चाहे कितनी भी बुरी क्यों न हो, बेहतर हो जाती है.
मैं बहुत शोध करता हूं, मैं यह सोचने की कोशिश करता हूं कि इसका संगीत से क्या संबंध है और मैं बस ढेर सारी चित्रकारी करता हूं. इस तरह से अपने विचारों को कार्यान्वित करना बहुत आसान है.
मेरा संगीत है – मैं यह नहीं कहना चाहता कि मेरा मुख्य फोकस क्या है, लेकिन यह वही है जो मेरे अंदर सबसे स्वाभाविक रूप से आता है.
मेरे पास कोई दिशा नहीं थी. मैंने सोचा, ‘मुझे अपने जीवन में बदलाव लाने की ज़रूरत है,’ और संगीत मेरा जवाब था.
अगर मैं कुछ घोषणा करता हूं तो मैं यह सुनिश्चित करता हूं कि मैं उसे कर रहा हूं.
I’m not used to saying I’m gonna do something and i don’t do it.
मुझे यह कहने की आदत नहीं है कि मैं कुछ करूंगा और मैं वह नहीं करूंगा.
मुझे तहखाने से बाहर निकलना होगा. मुझे दुनिया देखनी है. मुझे फर्क लाना होगा.
मेरे पास अभी लिखने के लिए बहुत सारी किताबें हैं. तो मैं घर से ही लिखूंगा. कभी-कभी मैं कार्यालय में, अपने कक्ष में भी लिख रहा होता हूँ. यह एक गड़बड़ी की तरह लग रहा है. ऐसा नहीं लगता कि कोई भी इस स्थान का उपयोग करता है.
दृष्टिगत रूप से सोचना मेरा शुरुआती बिंदु है, और फिर लेखन होता है.
मैं कुछ ऐसा चाहता था जहां मैं एक ही समय में कॉमिक्स और संगीत का अन्वेषण कर सकूं.
मुझे लगता है कि मेरा पसंदीदा माध्यम संगीत है, मेरे मुख्य उपकरण मेरी आवाज़ और गिटार हैं. लेकिन मैं अपने हर काम में मदद करने के लिए हर दूसरे माध्यम को बेहद संतुष्टिदायक और उपयोगी मानता हूं. कभी-कभी मुझे सिर्फ एक कॉमिक के लिए गाना बनाने की जरूरत पड़ती है. मेरे लिए सभी कलाएं और माध्यम जुड़े हुए हैं.
जितने अधिक लोग आपके बारे में जानेंगे, भले ही आप एक दलित व्यक्ति हों, तब आप बहुत अधिक आलोचना के घेरे में आ सकते हैं और आपको उतना ही अधिक ध्यान मिलेगा और आप लोगों के सामने उतने ही अधिक भयभीत या खतरनाक दिखाई देंगे. और उतने ही अधिक लोग आपको नीचे गिराने का प्रयास करेंगे.
मैं कला बनाना जारी रखना चाहूंगा, जिसमें मुझे जो पसंद है वह कर सकूं और इससे मेरे लिए अपने परिवार का भरण-पोषण करना संभव हो सके. मैं लोगों को खुश करना चाहता हूं, लोगों को अच्छा समय दिखाना चाहता हूं और उम्मीद है कि कुछ लोगों को प्रेरित करूंगा.
मुझे लगता है कि आम तौर पर लोग सोचते हैं कि वे मरने से डरते हैं लेकिन मुझे वास्तव में लगता है कि लोग जीने से अधिक डरते हैं. लोग अपनी पसंद का चुनाव करने से अधिक डरते हैं क्योंकि खुश रहने के लिए उन्हें बहुत कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं. मुझे लगता है कि बहुत से लोग वास्तव में इससे डरते हैं. एक बैंड में रहना आसान है क्योंकि आपके पास छिपाने के लिए बहुत सी चीजें होती हैं इसलिए यह वास्तव में हमेशा जीना नहीं है… यह हमेशा उस तरह से जीवन जीने का मतलब नहीं है जैसा आप चाहते हैं. लेकिन कभी-कभी आपको जीवित रहने के लिए ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जो कभी-कभी दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं.
मेरे जीवन में एक ऐसा क्षण आया जब मैं वास्तव में खुद को मार डालना चाहता था. और एक और क्षण था जब मैं उसके करीब था. लेकिन मेरे सबसे निराशाजनक समय में भी, मुझे कुछ आशा थी.
क्या मैं आपकी एकमात्र आशा बन सकता हूँ ? क्योंकि तुम ही मेरे लिए एकमात्र आशा हो.
मैंने हर चीज़ में सुंदरता और हर चीज़ में कुरूपता देखना सीखा. मैंने बहुत ईमानदार दृष्टिकोण विकसित किया.
मैं बस दुनिया को कुछ खास देना चाहता हूं.
लोगों के बदलने जैसी कोई बात नहीं है…आप उन्हें सिर्फ बेहतर तरीके से जान पाते हैं..
The most wonderful people are those who don’t need anything from anyone.
सबसे अद्भुत लोग वे हैं जिन्हें किसी से कुछ भी नहीं चाहिए.
तुम्हें खुद को ही बिकना पड़ेगा !!
यहाँ हर चीज़ सिर्फ और सिर्फ अपनी-जैसी पैदा होती है, “
_ तो आप दूसरों की जरूरतों और वरीयताओं को पूरा करने में ही जीवन गुजार देंगे.!!
फिर मन से दोस्ती की और जीत गया..
_ अपने हृदय को लोगों की प्रशंसा से प्रसन्न न होने दें.. और न ही उनकी निंदा से दुःखी होने दें.!!
_ लेकिन ये शब्द और विचार वो चाबियाँ हैं.. जो जंग लगे ताले को खोल सकते हैं.!!
_ पसंद का काम और मन मिला, तो जीवन अपने आप खिल गया”
“मस्त जिंदगी लग्जरी [Luxury] नहीं, स्पष्टता [Clarity] का नाम है.”
_ आपका जवाब होना चाहिए –”हां, मैं जिंदादिली के साथ जिंदा हूं..”
_ जो अपने होने को समझ गया, उसे दुनिया समझने की ज़रूरत ही नहीं रहती.!!
_ मैं भले ही सस्ता हूँ.. पर मुलाकात महंगी बना कर जाऊंगा.!!
_ उसे राज़ ही रखें तो बेहतर है..!!
_ और ये ख़ुशी पहले-पहले अकेलापन लाएगी, “फिर एक दिन वो आनंद का राज़ बन जाएगी”
“जिन्हें मैं सबसे पहले अपनी ख़ुशी बताना चाहता था, वो ही समझने को तैयार नहीं थे…
_ तो मैंने ख़ुशी से कहा – चलो, सिर्फ तुम और मैं मिलकर जीते हैं”
_ क्योंकि जिस दिन तुम पूरे खिलोगे, वही अनुभव है उसका..!!
_ जो मुझे बिना ढूंढे भी महसूस कर रहा है”
_ जीवन में जो चीज मेरी सांस को भारी करे, वो मेरे लिए नहीं है – चाहे वो कितनी ही सही लगती हो.!!
_ मुझे अपने पुराने रूप में रहना बिल्कुल पसंद नहीं, वह एक दुःखी व्यक्ति था.!!
_क्योंकि प्लानिंग हमेशा से मुझे तमाचा मारते आई है.!!
_ याद रखना, कोई भी नहीं, जब आपको पता चल जाए कि आपका यहां अपना कोई भी नहीं है,
_ तो आप जीवन को ज्यादा अच्छे से, खूबसूरती और जिंदादिली के साथ जी पाते हो !!
_ अपनी खुशियां जितनी छुपा कर रखोगे.. उतना खुश रहोगे..!!!
_ कोशिश करें कि सुकून का ताल्लुक किसी इंसान से न हो.!!
_ बस यही एक काम है.. कि बस सोच सकते हैं बिना किए..
_ अगर करने पर आ गए सब का मंगल.. तो मंगल करने वाला बचेगा नहीं.!!
_ रोज कीचड़ में फंस जाता, रोज धक्का लगाते..
— और सही मायने में मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता —
— ” मुझे अपनी धुन पसंद है — मेरे अपने नियम हैं.”
_ मर-मर के ज़िंदगी को आसान किया मैंने.!!
_ मैं तो गहरे रंग चुनूँगा.. जिन्हें देखकर लोग चौंकें.!!
_फिर क्यों एक जैसा दूसरा तलाशते हैं लोग.!!
_ ‘मस्ती और आनन्द से जिओ’- औरों की चिंता में दुबले मत होओ.!!
_ और मैंने इस रोग को कभी लगने नहीं दिया.!!
_ पछी तू तो उड़ जाने वाला है, रात भर का बसेरा है तेरा.!!
_ और उड़ गया पछी और कह गया ‘अब लौटना नहीं होगा’
_ एक इंसान दूसरे इंसान पर कभी भी हावी नहीं हो सकता – और किसी को होने भी ना दें..
_ कुल मिलाकर बात यह है कि एक ही जीवन है मस्त रहो.!!
_ हर एक की समझ का एक स्तर होता है और सिर्फ़ इस बात के लिए आपको लोड लेने की ज़रूरत नहीं है कि.. दूसरों कि समझ का स्तर अलग है ;
_ आप अपनी लाइफ और अपनी समझ के हिसाब से समझिए चीजों को.. _ और दूसरों को उनकी समझ घिसने दीजिए.!!
_ वहीं जो कुछ भी हमें सत्य से परिचित करवाकर झकझोर दे अन्दर तक, उसे दुःख मानने लगते हैं.
_ सत्य से जो परिचय करवा रहा, उसे कोई नहीं चाहता, विचित्र..!!
_ अच्छा ये बताओ बचपन से लेके आज तक मन का हुआ क्या था ?
_ बावजूद इसके ज़िन्दगी चलती रही ना… निराश न हो आगे भी चलती रहेगी….!
_ यदि नहीं, तो पहले अपनी स्थिति को सुधारो.!!
_ जो नहीं करता वो दोष जिंदगी को देता है.. पर दोष उसका खुद का है.!!
_ अब मुझे सिर्फ वही चाहिए.. जो मेरे भीतर से उठे, ना कि जो बाहर से सिखाया जाए.!!
_ अब मैं खोया हुआ और दुनिया से बेखबर, अपने जीवन को जी भरकर जीता हूँ.
_ मेरा हर दिन उन चीज़ों से भरा होता है जो मुझे पसंद हैं.
_मैं घूमता हूँ, वॉक करता हूँ, कुछ पढता-लिखता हूँ.!!
_ हमारी तलाश ज़िंदगीभर अधूरी रह जाती है, हम जो चाहते हैं वो हमें कभी नहीं मिलता ;
_ और जब वो मिलता भी है, तब तक हम बहुत दूर जा चुके होते हैं,
_ जो मिलता भी है तो हमारे अपेछा के अनुरूप नहीं होता,
_ जहां अपने मन का कुछ न हो, ऐसा जीवन पराया-सा लगता है..!!
_ यदि यह न होता तो शायद कुछ और कमी होती..!!
_ जवाब है – जो है उसके अलावा सब..!!
_ आप जीवन को अलग नजरिये से देखना शुरू कर देंगे.!!
_ मेरा सच कोई विज्ञापन नहीं, एक खुशबू है—चाहे महसूस हो या न हो.
_ वह अपने जीवन को अपने तरीके से जीने का सामर्थ्य रखता है.””
_ क्योंकि आप उनके संघर्ष की पिछली कहानी नहीं जानते.
_ आप नहीं जानते कि वे वहाँ कैसे पहुँचे..!!
_ जब मैं अपनी मौज में, अपने तरीके से जीता हूँ..
_ तो मुझे किसी की परवाह ही नहीं रहती..
_ कि किसने मेरे साथ क्या किया था.
_ बीती बातें महत्वहीन लगती हैं.
_ तब महसूस होता है— क्या रखा है इन सब बातों मे.!
_ ज़िन्दगी बस खूबसूरत है, और मैं इसे अपने रंग में जीता हूँ.
_ “और मैं इसे अपनी मौज में ही जीना चाहता हूँ”
_ जहां भी जाता हूं.. एंजॉय करता हूँ, क्योंकि यह संसार सच में एक रंग-बिरंगा मेला है.
_ इसे समझाने की नहीं, महसूस करने की ज़रूरत है.
_ मेरी मौज किसी और की मंज़ूरी पर टिकी नहीं है.
_ मुझे मेला देखना है, दुकानदार बनकर हिसाब नहीं लगाना.!!
“जिंदगी में मजा-मौज अपने आप नहीं आता है, लेना पड़ता है”
_ ” जो स्थायित्व की तलाश में हैं, वो जल्दबाजी से नहीं, समझदारी से चलता है”
_ और जो आंख वाले नहीं हैं, उन्हें मैंने अपना बनाया नहीं.!!
_मैं खुद ही किसी के आगे हारा तो हारा.!!
_ जड़ सूखा हो तो फल नहीं लगते.!!
_ आप अपना अधिकार स्वयं पर खुद रखें, यह किसी को देंगे तो परेशान होना तय है.!!
_ इंसान यहां खुद से मिलने आया है लेकिन मिलकर दुनियां से जा रहा !!
_ मुझे कुछ नहीं पाना, क्योंकि जो मेरे पास है, वह इतना महत्वपूर्ण और बहुमूल्य है कि उसे खोकर मैं कुछ और पाना नहीं चाहता.!!
Its better to have one in hand than two in the bush.
_ मुझे ये बहुत अच्छी लगता है और मैं भी पहले अब ढीठ ही होना चाहता हूँ.!!
_ तब से मैंने आराम को जरुरत से ज्यादा महत्व नहीं दिया.!!
_ समझदारी यही कहती है, कि बस चुप रहिए..!!
_ जिसको जिससे उलझना है उलझे, ये मेरा मसला कतई नहीं है,
_ क्योंकि जो मेरा मसला था _ वो भी अब मेरा नहीं रहा..!!
_ अपने काम से काम रखता हूँ और मस्त रहता हूँ ..!!
_ यहाँ तक कि जीने की वजह भी दूसरा..
_ मेरा होना मेरे लिए कोई वजह क्यों नहीं है ?
_ चंगा-भला था मैं जब अपनी गुफ़ा में था, रोशनी में क्या आया कि मोह खिंचे चले आए..
_ अँधेरे के अपने दुख, रोशनी के अपने दुख..
_ अपने को अपने लिए अब ज़्यादा रखूँगा, दूसरों के लिए ज़रूरत भर..
_ कह देने से कमिटमेंट बढ़ जाती है, इसलिए कहा..
_ तुम, ये, वो.. सबसे मुझे क्या काम ?
_ मुझसे ‘मैं’ ही क्या कम है.. उलझने को..!!
_ इसलिए सबसे अधिक स्वयं को स्वस्थ व प्रसन्न रखना जरुरी है !!
_ आपको उस दिशा में “सतर्क” करने का या उस दिशा में कोई “मजबूत निर्णय” लेने का..!!
– जब एक मनुष्य उस शुद्ध चेतना से एक हो जाता है, तो उसकी व्यक्तिगत पहचान खो जाती है.
_ मैं ज्ञान से जीता हूँ और संसारी चतुराई से जीता है.!!
_ अब मन नहीं करता जवाब देने का… _ “कम बोलना है, सीखना ज़्यादा है.
_ बहसबाजी से बचना है, जब तक बहुत जरूरत न हो…
_ रूटीन सही करना है…बचे हुए कई काम करने हैं…
_ कहानियां लिखनी हैं…अच्छा-अच्छा देखना है…
_ नई-नई जगहें देखनी हैं. अच्छा-अच्छा पढ़ना है…!!
_ वे मेरे बारे में अलग-अलग सोचते हैं.. जो उन्होंने अपने मन में बना रक्खा है,
_ जब वे मुझे असली तौर पर जानते हैं या फिर जब मैं उन पर भरोसा करते हुए अपनी असली पहचान बताता हूँ, तो वे कहते हैं कि तुम बदल गए हो…
_ लेकिन कुछ चीजें हैं..जिन्हें आपको स्वयं देखना होगा.!!
_ वरना तो दुनिया गन्ने का रस निकालने वाली मशीन की तरह हमारा रस निकाल ही लेगी.!
_ मैं फुर्सत की चीज़ हूं और ज़माना जल्दबाजी में है.!!
_ और अच्छा जीवन जीने का फॉर्मूला देता हूं.!!
_इसे रहने के लिए एक अच्छी जगह बनाएं.!!
_ “कड़वा लगेगा जागा हुआ व्यक्ति”
_ वह सब लौटेगा जो आपके पास आना चाहिए.. क्योंकि इंसान का हिसाब गड़बड़ हो सकता है.. ऊपर वाले का नहीं..!!
_ अपने मन रूपी स्याही से इस पर कुछ भी लिखते रहते हो, पर स्याही मिटती नहीं..
_ पेंसिल बना लो मन को..
_ रात तक आते आते सब कुछ मिट जाए… इसी मन से ही..!
_ अपना अगला दिन फिर रिफ्रेश शुरू हो..
_ यूं ही रंग बिरंगा और मस्त-मगन जीवन..!!
_ आनंद (joy), वास्तव में हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और खुशी (happiness) से भी अधिक मौलिक है.
_ बर्बाद, बंजर भूमि में भी मुझे हरियाली दिखती है.!!
_ बल्कि वो लोग समझेंगे.. जो उस दौर से गुजरे हैं.. जिससे मैं गुजरा हूँ.!
_ बहुत चला सबके मुताबिक,, अब जाकर,, ख़ुद को जाना है !!
_जो ख़ास था.. वो ख़ास नहीं रहता..
_ जो भी हो रहा होता है.. वो ख़ास हो जाता है..!!
_ सब कुछ छणिक है, मस्त-मगन रहिए और इस दुनिया से कुच कर जाइए !!
_ मेरे परखने का मिजाज थोड़ा अलग है.!!
_ पर यहां तो सब ओवर एक्टिंग कर रहे हैं, एक्टिंग के अंदर भी एक्टिंग..
_ तभी तो लाइफ फ्लॉप हो रही, अब पता चला सही से..!!
_ सदबुद्धि के अभाव में ही एक इंसान उल-जुलूल हरकत करता है, जीवन में गलत का चुनाव करता है.!!
_ हर कोई वही नहीं रहता जो पहले था, और कुछ रिश्ते समय के साथ बदल जाते हैं.
_ तुम्हें खुद पर ध्यान देना चाहिए और अपनी ज़िंदगी आगे बढ़ानी चाहिए.
_ तुम्हें ऐसे लोगों के साथ घूमना चाहिए, जो तुम्हें खुश करते हैं और तुम्हारी परवाह करते हैं.
_ ऐसा है जैसे बांसुरी बजाते हुए पीठ पर मन भर बोरा लेकर चलना…
_ इस गति से जीवन में सबकुछ बहुत दूर ही नजर आता है..!!
_ वो क्या है – जो मेरे पास है और किसी के पास नही,
_ जो आपके पास है.. वह बिरला है और इसे पाने के लिये किसी दूसरे को कितने जीवन लग जायेंगे या अनथक प्रयास करना होंगे.. आप कल्पना भी नही कर सकते,
_ अब जब मैं धीरे – धीरे बहुत कुछ छोड़ता जा रहा हूँ, भीतर की ओर बढ़ रहा हूँ तो एहसास हो रहा है कि तमाम अवगुणों के बावजूद.. कुछ है जो मेरा है, अनूठा है..
_ और जिस पर मैं कम से कम भीतर ही भीतर ख़ुश हो सकता हूँ और गर्व कर सकता हूँ..
_ बस इतना कहूँगा कि जो आपके पास है, जैसा भी है, जितना भी है – उसे खोइये मत..
– वरना सच में आपके पास अपना कुछ नही रहेगा..
_ एक और दिन खोने से बड़ा दुःख दुनिया में कोई नहीं हो सकता.!!
_ मैंने पूछा क्यों दौड़ रहे हो ?
_ उसने कहा, क्योंकि सब दौड़ रहे हैं.!!
“सब दौड़ रहे हैं तब.. मैं तो अपना एक कदम पीछे की ओर लूंगा !!”
_ मन शांति की तलाश में, और दिल अपनो की तलाश में.!!
_ सुबह सुबह बिना अलार्म घड़ी के ही चिड़ियों का चहचहाना..ये सब मामूली बातें होते हुए भी मुझे हैरान कर देती हैं..
_ कल की कली का फूल बन जाना, इतनी छोटी सी चींटी का इतना अनुशासित होना.. सब देखते ही दिल धकधक करने लगता..
_ किसी प्रसिद्ध गायक के वीडियो देखता हूँ तो पीछे वाद्य बजाने वाली मंडली को देखकर अवाक रह जाता हूँ, लगता है ऐसे कैसे कोई बजा सकता है..
_ दिल में एक काश सा उठता है कि-काश मुझमें भी यह कला होती !!
_ रोज़ दिन का उगना, रोज़ शाम का आना, रात का जादू सब मुझे परीलोक की घटनाएं लगती हैं,
_ सोचता हूँ.. कैसे सब घटनाएं एक निरंतरता में, सलीके से घटित होती हैं…
_ ट्रेनों का प्लेटफॉर्म पर लगना- चलना, हवाई जहाजों का आकाश में उड़ना, टिकट छपना, सब मशीनों, यंत्रों का कमाल भले हो..
_ पर मैं इन्हें उसी चकित भाव से देखता हूँ.. जैसे कोई बच्चा देखे..
_ कपड़े पर डिजाइन उकेरना, कुम्हार का चाक पर बर्तन बनाना.. सब मुझे रॉकेट साइंस जैसा गूढ़ और अनूठा लगता है..!
_ पेड़ के पत्तियों के झड़ने से लेकर उनमें नई पत्तियों के आने, उनके रोज़ रोज़ बड़े होने, रंग बदलने, फूल और फल आने को ग़ौर से, नियम से देखने पर भी लगता है कि यह तो जादू है..
_ कल पत्तियां बैंजनी थीं, आज काही कैसे हो गईं, अभी परसों ही तो इतनी छोटी थीं.. दो दिन में बड़ी कैसे हो गईं..!
_ लोगों को लिखते, पढ़ते, गाते, नाचते देखता हूँ तो जादू सा लगता है..लगता है कि क्या ही कमाल लोग हैं यार, कैसे कर लेते हैं यह सब..
_ मेरे लिए तो दुनिया की हर घटना, हर शै जादू से भरी..
_ जाने हैरानियों का सिलसिला कब थमेगा, जाने मेरे मन का बच्चा कब बड़ा होगा..जाने मुझे कब हर चीज़ मामूली लगेगी..!!
_ जो व्यक्ति अपने परिवार को सुचारू रूप से चलाता है, उससे बड़ा कोई तपस्वी नहीं है.
_ बिना किसी आसक्ति के अपने दायित्वों का निर्वाह करना किसी संतत्व से कम नहीं है.!!
_ अब न मैं ध्यान करता हूँ,
_ अब तो बस हूँ…
_ हर श्वास में, हर चाल में, जैसे कोई मौन बहता हो..
_ चाय की प्याली उठाते समय, या किसी फूल को छूते हुए —
_ मन नहीं भागता,
_ वो तो यहीं है… ठहरा हुआ, लेकिन जीवित.
_ अब तो शब्द भी ध्यान हैं, और मौन भी.
_ अब तो हँसी भी प्रार्थना है, और आँसू भी स्वीकार.
_ ना कोई प्रयत्न है, ना कोई लक्ष्य,
_ सिर्फ एक सहज बहाव —
_ जैसे जीवन स्वयं ध्यान बन गया हो.
“अब बाहर की हलचल मुझे छूती जरूर है, लेकिन हिला नहीं पाती”
_ कोई भी आपके लिए ऐसा नहीं करेगा, कम से कम उस तरह तो नहीं जैसा आप चाहते हैं.
_ आपको अपने अंदर के बच्चे को साथ लेकर चलना चाहिए..
_ और वह सब करना चाहिए.. जो वह आपसे करवाना चाहता है,
_ क्योंकि कोई नहीं जान पाएगा कि आपने क्या नहीं जिया..
_ उन्हें नहीं पता कि आपके अंदर क्या है.
_ और अगर उन्हें पता भी है, तो यह उनका कर्तव्य नहीं है.
_ जो चीजें आपको खुश करती हैं, उन्हें करना आपका कर्तव्य है.
_ आपके चेहरे पर मुस्कान लाने वाली चीजें आपके अलावा कोई नहीं जान पाएगा..
_ और अगर आपको भी नहीं पता, तो पता लगाएँ.
_ घूमें-फिरें और पता लगाएँ कि आपको क्या खुशी देता है और उसका ख्याल रखें.
_ आपको उन लोगों का ख्याल रखने की ज़रूरत है.. जो आपके दिल के सबसे करीब हैं.
_ यह आपका कर्तव्य भी नहीं है, लेकिन यह आपकी खुशी के लिए है.
_ आपको अपने सारे काम खुद को खुश रखने के लिए करने चाहिए.
_ आपको अपना ख्याल उसी तरह रखना चाहिए.. जिस तरह आप दूसरों का रखते हैं.!!
_ लोग, वस्तु, संसार से लगाव कम कीजिए.
_ आपको सिर्फ और सिर्फ आप ही बचा सकते हैं, कोई दूजा न आएगा.!!
_ अब खुद को खुद से मिलवाऊँगा, मैं अब उन सपनों तक जाऊंगा, जो मैंने कभी देखे थे, लेकिन औरों की देखभाल या अपनी ज़िम्मेदारियों में इतना व्यस्त हो गया कि खुद को ही भूल गया,
_ क्योंकि इस सारी उथल-पुथल के बाद, मैं एक ऐसी खुशहाल जगह का हक़दार हूँ,
_ जहाँ मेरे सारे छोटे-छोटे सपने मुझमे में बसने के बजाय दीवारों पर टंगे न हों.!!
– कभी-कभी जीवन की सबसे गहरी चिकित्सा वही होती है — जब हम फिर से अपने आप की ओर लौटते हैं.
_ जब हम वो करते हैं जो हमें भीतर से जीवित महसूस कराता है — बिना किसी के सहारे, बिना किसी की मान्यता के..!
_ यह एक शांत प्रतिज्ञा है — “मैं अब अपनी शांति का ज़िम्मेदार खुद हूँ”
_ कोई और नहीं जानेगा कि मुझे कब, किस तरह सुकून चाहिए — इसलिए अब मैं खुद अपने भीतर वो स्थान बनाऊँगा जहाँ कोई और प्रवेश न कर सके.!!