मस्त विचार 702
समय के हाथों, पर मै बेचारा नहीं हूँ. अकेला हूँ, तनहा हूँ. लेकिन तनहाइयों से डरा नहीं हूँ. मै थक जरूर गया हूँ दोस्तों, पर अभी तक हारा नहीं हूँ. मै फिर उठ खड़ा हुआ हूँ दोस्तों, जिन्दा हूँ, अभी तक मरा नहीं हूँ.
समय के हाथों, पर मै बेचारा नहीं हूँ. अकेला हूँ, तनहा हूँ. लेकिन तनहाइयों से डरा नहीं हूँ. मै थक जरूर गया हूँ दोस्तों, पर अभी तक हारा नहीं हूँ. मै फिर उठ खड़ा हुआ हूँ दोस्तों, जिन्दा हूँ, अभी तक मरा नहीं हूँ.
एक नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है !
पर चुप इसलिये हूँ कि जो दिया तू ने वो भी बहुतों को नसीब भी नही होता.
गीत तेरा हर वक़्त गाने लगा हूँ, तू मिल गया है सारा आलम महका, झूमते झूमते खुद पे इतराने लगा हूँ,
और दूसरों पर रखो तो कमजोरी बन जाती है…
कुछ लोग बेगाने लुट गए.. कुछ अपनो ने बदनाम किया, कुछ बन अफसाने छूट गए .. कुछ अपनी शिकस्ता नाव थी, कुछ हम से किनारे छुट गए ..!
तसल्ली हैं कि अभी तक शक्ल की पहचान बाकी हैं…!
चलने मे माहीर बन जाऊँगा. …..या तो मंजिल मिल जायेगी ….या मूसाफिर बन जाऊँगा.
पर बहुत कुछ दिखा जाता है………..