मस्त विचार 638
इंसान सुनता आधा है, समझता चौथाई है,
सोचता शून्य है और प्रतिक्रिया दुगुनी देता है.
सोचता शून्य है और प्रतिक्रिया दुगुनी देता है.
_ उसके फल खा कर चीखतें हैं.. कि धरती ने हमारे साथ धोखा किया है.
पर कभी किसी की ” जरुरत ” नहीं क्योंकि ” जरूरतें ” तो हर कोई पूरी कर सकता है पर किसी की ” कमी ” कोई पूरी नहीं कर सकता.
जिंदगी में हमेशा सबकी ” कमी ” बनो
असंभव तो मूर्खों की डिक्शनरी में ही मिलता है.
छोटी- छोटी खुशियों को अपने आस-पास तलाश करें,
जो आपको ताजगी और सुकून देती हो.