सुविचार – उधार – कर्ज – कर्जा – ऋण – ईएमआई – EMI – लोन – Loan – 057

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उधार की अमीरी चैन की सांस नहीं लेने देती.
जिसकी ईएमआई नहीं चल रही है और कोई कर्ज न हो,

_ समझ लेना उसकी जिंदगी बढ़िया चल रही है..!!

EMI [ईएमआई] या किसी भी तरह के लोन के जाल में न फँसें..
_ जितनी चद्दर उतने ही पांव फैलाये.!!
जितनी अर्निंग [earning] है, उसी में अच्छा जीवन जीना, लोन [loan] से दूर रहना.
_ मेरी जितनी Earning है, उसी में अच्छे से कैसे रह सकते है, Loan से दूर रहना.
– मैं उसी पर ध्यान देता हूँ.
ऋण से जो बच गया वो वास्तव में सुखी है, लेकिन आपने महसूस किया कि आपके चारों  तरफ से इन्हीं चीजों को थोपा जा रहा है..

_ यहां तक अब टूरिस्ट लोन, शिक्षा लोन इत्यादि भी ___ ऋण एक अंधे कुँवे के सामान है, इससे बचिए..

ईमानदार लोग दिखावा नहीं करते, वे कर्ज मुक्त और सादगी से जीवन जीते हैं और खुश से रहते हैं..!!
ईमानदारी से पैसे कमाने वाले लोग सीधे और सच्चे होते हैं, सच्ची बातें करते हैं और अच्छे होते हैं, अच्छा व्यवहार रखते हैं, किसी का कर्ज नहीं रखते अपने ऊपर..!!
ईमानदारी से मेहनत करने वाला कभी कर्जे में नहीं होता,

_ जो आय से ज्यादा खर्च करता है.. वही कर्ज में होता है..!!

सबसे पहले तो हमें अपने बेवजह के खर्चों को खत्म करना चाहिए..
_ क्योंकि लोन के पैसों से लग्जरी जीवन व्यतीत नहीं करना चाहिए.!!
अगर यह दुनिया आपकी एक बार मदद करे, तो यह सौ गुना अहसान जताएगी.

_ क्योंकि दुनिया मदद नहीं कर सकती, सिर्फ़ उधार देती है.
_ जब भी आप इस दुनिया को आईना दिखाएँगे, यह उधार वापस माँगेगी.!!
चादर से बाहर पैर फैलाने वालों का जीवन चिन्ता करने में ही निकल जाता है और आखिर में फिर भी हाथ खाली रह जाते हैं.

_चक्रवृद्धि ब्याज सहित किश्तें पटाते-पटाते ज़िंदगी का सुनहरा दौर यूँ ही निकल जाता है.!!
कर्ज में डूबा हुआ शरीर अपना खून हर दिन सूदखोरों को पिलाता रहता है.
जग में पहला दुखी निर्धन है, _ उससे अधिक दुखी कर्जदार है.
खुद की कमाई से पार पड़ेगी, उधार की रोशनी कब तक चलेगी..!!
औकात से बड़े दिखावे, _ इंसान को कर्ज में डूबा देते हैं.
जिसके पास किसी का कर्ज नहीं, _ वह बड़ा मालदार है.
उधार लेने से धन अधिक खर्च होता हैं.
सही तरीके से कमाने वाले कभी कर्जा लेते ही नहीं.

_ वो अपने खर्चे सीमित रखते हैं.

कर्ज वो बीमारी है जो आदमी को जीते जी नरक में ले जाती है, _

_ कर्ज अच्छे से अच्छे परिवार को तबाह कर देता है.

पैसे उधार लेने का अर्थ है, दूसरों के कर्म को अपने जीवन में लाना,

_ ऐसे काम क्यों ही करना.. ये घोर नकारात्मक ऊर्जा है..!!

उधार देकर बाद में गिड़गिड़ाने से बेहतर है ;
_पहले ही ‘ना’ बोलकर अपना स्वाभिमान बचा लो.!!
लोन देने वाला उस आदमी की तरह है जो सूरज निकलने पर आपको छाता देता है,

_लेकिन पानी बरसते ही वह उसे वापस मांगने लगता है.

“ऋण – कर्ज”

_ यह ऐसी चीज है जो बिना सोचे लिया गया तो आप को निश्चित ही डुबोएगा.
_ एक कर्ज को पूरा करने के लिए दूसरा कर्ज..
_ और इस प्रकार कर्ज बढ़ता ही जाता है.!!
महत्वाकांक्षा पर लगाम लगाएं,

_ देखा देखी में, बाइक, कार, फर्नीचर, टीवी मोबाइल अब ईएमआई पर आज कल धड़ल्ले से लिया जाता है..
_ और अंत में यह इतना बढ़ जाता है की आय से अधिक खर्च होने लगता है,
__ ऐसे में आकस्मिक खर्च की स्थिति होने पर लोन लेना पड़ता है, और फिर आप डूबते ही रहते है कर्ज में.
— इन दिनों रिश्तों में दूरियाँ बढ़ती ही जा रही हैं,
_बढ़ती महँगाई, जानलेवा प्रतिस्पर्धा, आसमान छूते सपने और महत्वाकांक्षाएँ मनुष्य का जीवन इन सबमें पिस रहा है..
उधारी का सामना हमें करना पड़े तो हमारा अन्तःकरण शांत नहीं रह सकता है.

_ जिसने उधार लिया है, वह शांत नहीं रहता.
_ “सादा खाओ, सादा पहनो” आफत न सिर पर आएगी,
_ चार दिन की जिंदगी आराम से कट जाएगी.
किसी भी रिश्तेदार या जान पहचान की लोन लेने में मदद के अनुरूप बैंक में गारंटी देने का मतलब यह होता है कि आवेदक के लोन चुकाने में अगर कोई कोताही होती है तो गारंटर इस बात की जवाबदेही लेता है और लोन चुकाने की जिम्मेदारी भी..!

_ इसलिए लोन लेने वाले के साथ लोन की गारंटी देने वाला भी लोन चुकाने के लिए बराबर जिम्मेदार होता है.!!
उधार लेने वालों से निवेदन है कि फालतू खर्च करने से पहले..

_ उन लोगों का कर्ज जरूर उतार दें, जिन्होंने नेक इंसान समझ कर आपको उधार दिया था.
किसी के भरोसे को मत तोड़ो ; फालतू खर्चों से पहले उस इंसान की पाई-पाई लौटाओ.. जिसने आपको अपना समझकर निस्वार्थ उधार दिया था.
सुविधाओं और साधनों से संपन्न होने की कोशिश हर व्यक्ति को करनी चाहिए,

_ लेकिन अपनी सीमाओं का ध्यान रख कर.
_ जैसे, अगर आप कर्ज ले कर एक के बाद दूसरी वस्तु खरीदते जाते हैं,
_ तो हो सकता है कि आप कर्ज से इस तरह लद जाएँ कि मन की शान्ति भी गँवा बैठें.
_यह कोई जरुरी नहीं कि सुविधाओं व साधनों की प्रचुरता एक व्यक्ति और उस के परिवार को सुखी ही रखे.
_ इसलिए सिर्फ सुख सुविधाएँ ही जुटाने पर जोर न दें.
_ आप की सफलता और लोकप्रियता में आप के व्यक्तिगत गुण ज्यादा काम आएँगे.
ऋण लेकर नया धंधा शुरू करने से पहले उन संभावनाओं पर भी गहन विचार कर लेना चाहिए..

_ कि अगर धंधा ना चला तो आप लिया गया ऋण उतार पाओगे ??
_ कुछ लोगों की जिंदगी ठीक- ठाक चल रही होती है,
_ मगर वो गलत सलाह या अति उत्साह में ऐसा कदम उठा लेते हैं कि वो आत्मघाती सिद्ध हो जाता है.. और वो सड़क पर आ जाते हैं.
_ याद रखिये, रिस्क लेना बुरी बात नहीं,
_ मगर औकात से बढ़कर लिया गया रिस्क तबाह कर सकता है..
_ और जब बुरे दिन शुरू होते हैं, तब सारे अपने मुहँ मोड़ लेते हैं..
_ और जर्रा जर्रा दुश्मन हो जाता है.
क्यूँ जीते हो आप ऐसी ज़िन्दगी, जिस से हो जाये लोन- क़र्ज़.!

_ जितनी कमाई उतना खर्च, ये हुनर सीख लो ना..,
_ लेकर लोन, अन्जाने में घोट रहा, अपना गला तो नहीं..,
_ बेवजह दुनियाँ को दिखाने के लिए, क्यूँ जरूरतें बढाता है..,
_ जितना कुछ है तेरे पास, क्यूँ उसी में खुश नहीं रह पाता है..,
_ क्यूँ जरूरतें हो जाती है, जिन्दगी पर फिर सवार॥
_ अगर नहीं है सब्जी तेरे घर में, तो नमक से रोटी खा ले..,
_ अगर जरूरतें पूरी करनी है तुझे, तो मेहनत कर कर कमा ले..,
_ क्यूँ जीते हो आप ऐसी ज़िन्दगी, जिस से हो जाये लोन- क़र्ज़..!!
बीमारी और उधारी इन दोनों में से अगर किसी एक का सामना हमें करना पड़े तो हमारा अन्तःकरण शांत नहीं रह सकता है.

_ क्योंकि कोई रोग आ जाए तो हमारी सारी ऊर्जा उसी रोग से लड़ने में लग जाती है.
_ जिसने उधार लिया है, वह भी शांत नहीं रहता.”सादा खाओ, सादा पहनो” आफत न सिर पर आएगी, चार दिन की जिंदगी आराम से कट जाएगी.!!
रोग, ऋण, दुश्मन और अग्नि को कभी शेष मत छोड़िए.

_ छोटी सी चिंगारी जंगल जला देती है.
_ छोटा सा कर्ज पहाड़ बन जाता है.
_ छोटा सा रोग जीवन निगल लेता है.
_ और छोटा सा दुश्मन अवसर मिलते ही बड़ा संकट बन जाता है.
–“फैसला”–

“हर फैसले की एक अपनी गति होती है – कुछ तुरंत होते हैं, कुछ इंतजार मांगते हैं.
_ जो भी गति आपको सुकून दे, वही आपका सही रास्ता है” 🌿
_ ये आप अपने मन में दोहरा लीजिए जब भी निवेश या जीवन के किसी निर्णय को लेकर कन्फ्यूजन हो.
_ ध्यान रखना – फैसला लेने से पहले अपना सुकून महसूस करना ही सबसे बड़ी जीत है.
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“जो ख़ुशी अपनी औकात के अंदर जीने में है, वो किसी उधार की छाया में कभी नहीं मिलती”
“जो पैसा अपना है, उसमें सुकून है; जो पैसा उधार का है, उसमें बेचैनी का बीज है”
“संतोष में जो सुकून है, वो ईएमआई [EMI] भरने की दौड़ में कभी नहीं मिलता”
“अपनी कमाई के अंदर रहकर जीना, असल में आज़ादी का सबसे प्यारा रूप है”
“मैं उधार का बोझ नहीं- अपनी कमाई का सुकून जीता हूँ”
“जितना कम बोझ – उतनी गहरी सांस”
— ये लाइन आप अपने दिल में बसा लीजिए – जब भी लोन/ईएमआई का विचार आए, या दूसरे लोगों को देख कर मन में हल्का सा तुलना [Comparison] आए, बस इसे याद करना– ये आपके सुकून को और मज़बूत करेगी.!!
जो ईमानदारी से कमाता है, वह मस्त रहता है और कोई कर्ज नही होता,
_ क्योंकि जितने में उसका गुजारा हो.. उतना वो ईमानदारी से कमा लेता है.!!
ईएमआई चुकाता आदमी..

वो आदमी,
जिसे तुम दूर से देखते हो और कहते हो –
“क्या बढ़िया आदमी है, सेटल हो गया है!”
जिसके पास एक घर है,
जिसके दरवाज़े पर गाड़ी खड़ी है,
जिसके बच्चे महंगे स्कूल में पढ़ते हैं
मगर कोई उसके भीतर झाँक कर देखे
तो वहां मिलेगा एक आदमी,
जो हर महीने अपनी ही सांसों पर ब्याज भरता है
जो हर महीने अपनी आत्मा की एक किस्त जमा करता है
वो घर जिसे वो अपनी छत कहता है,
असल में वो घर उसकी नींद की गिरवी पर खड़ा है।
हर ईंट पर लिखा है —
“कर्जदार”
हर दीवार पर उकेरा है —
“अधूरा मालिक”
वो गाड़ी जिसे देख कर तुम जलते हो,
असल में वो गाड़ी नहीं,
उसके कर्ज का पहिया है
जो उसे हर सुबह बैंक की ओर घसीटता है
और हर शाम फिर से लौटाता है
खाली जेब, भारी दिल, और एक और दिन की थकान के साथ।
वो आदमी बाजार में सबका चेहरा देखता है
पर भाव नहीं पूछता
क्योंकि वो जानता है
भाव जानकर भी कुछ खरीदना उसके हिस्से में नहीं।
वो सेल के पोस्टर को देखता है,
मन करता है एक खिलौना उठा ले
पर जेब में टकराती ईएमआई की रसीदें
हर ख्वाहिश को कागज़ की तरह मोड़ कर रख देती हैं।
बच्चा पूछता है
“पापा, इस बार मेरी साइकिल पक्की ना?”
वो आसमान की ओर देखता है
मानो ऊपर कोई बैंक हो,
जो किस्तों में खुशियाँ बांटता हो।
बीवी कहती है —
“कब तक खुद को भूलते जाओगे?”
वो मुस्कुरा देता है
क्योंकि खुद के लिए तो उसने
किस्तों में जीना ही सीख लिया है।
वो आदमी
जिसके गुस्से की भी एक कीमत है
कि कहीं नौकरी न छूटे,
कहीं किस्तें न फिसल जाएँ
वो आदमी जो हर महीने खुद से कहता है —
“बस कुछ साल और… फिर चैन आएगा…”
मगर वो जानता है —
ये दौड़ कभी खत्म नहीं होती।
ये किस्तें तुम्हें तुम्हारे सपनों के बहुत पहले
तोड़ कर रख देती हैं
और अंत में,
वो आदमी वही बन जाता है
जो ये समाज सबसे ज़्यादा चाहता है
एक ऐसा आदमी
जो सब कुछ सहता है,
कुछ नहीं कहता।
जो हर महीने अपनी आँखों का पानी
और अपनी आत्मा का चैन
बैंक के खाते में जमा करता है
बिना शोर, बिना आवाज़।
वो आदमी,
जो जीता नहीं है
बस ईएमआई चुकाता है।
कविता : पंकज प्रसून
– Pankaj Prasun

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