सुविचार 5035
_ ज़िन्दगी की जंग जीतने के लिए आपको खुद हारने की हिम्मत रखनी होगी.!!
_ ज़िन्दगी की जंग जीतने के लिए आपको खुद हारने की हिम्मत रखनी होगी.!!
_ शायद हमारा रिश्ता भी वैसा ही है..
_ जहाँ मिलने की ख्वाहिश से ज़्यादा ना मिलने की कसक ज़िंदा रहनी चाहिए…!
_ उस पर भरोसा करना सबसे बड़ी भूल होती है.!!
_ कितनी अजीब बात है कि लोग कल के लिए जीते हैं और आज को ऐसे कुचल डालते हैं जैसे उसकी कोई कीमत ही न हो.
_ जबकि सच यही है कि कौन जाने कल किसका होगा, कौन जिंदा रहेगा और कौन सिर्फ याद बन जाएगा.
_ भविष्य की चिंता में खोए लोग अक्सर वर्तमान के छोटे-छोटे सुख गंवा देते हैं.
_ उनकी आँखों में सिर्फ एक दौड़ होती है जमा करने की, पाने की, सुरक्षित कर लेने की.
_ पर ये सब जमा करके किसके लिए ? किस काम का ?
_ जब आज ही जीने की फुर्सत न मिले, तो कल का खजाना किस काम आएगा ?
_ मुझे लगता है, जो लोग वर्तमान की साँसों को दबाकर भविष्य की थैलियाँ भरने में लगे रहते हैं, वे सबसे बड़े मूर्ख हैं.
_ क्योंकि वे न इस पल के रहते हैं न अगले पल के.
_ जैसे एक प्यासा आदमी जो पानी से भरा घड़ा देखकर भी मर जाए, क्योंकि उसने कभी एक घूंट पीने की फुर्सत ही नहीं निकाली.
_ असल में जीना तो आज है. कल का कोई भरोसा नहीं.
_ लेकिन अफसोस, ये सबसे सरल बात समझने में सबसे कठिन लगती है.
– Ishq Banaras
_ चेहरे पर मुस्कान रहती है, आवाज़ में सामान्य होने का अभिनय रहता है और हम दुनिया को यकीन दिलाते रहते हैं कि सब ठीक है.
_ मगर सच तो यह है कि हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी हो सकती है, जिसे सुनने वाला शायद ही कोई हो.
_ कुछ दर्द शब्दों में कहे नहीं जाते, बस आँखों में उतर जाते हैं और इंसान उन्हें उम्र भर अपने भीतर लिए घूमता रहता है.
_ मैं अक्सर सोचता हूँ कि आखिर हम उम्मीदों से इतने थक क्यों गए हैं ?
_ शायद इसलिए कि उम्मीद जितनी खूबसूरत होती है, उसके टूटने की आवाज़ उतनी ही गहरी होती है.
_ हम हर बार सोचते हैं—कल बेहतर होगा, कोई हमें समझेगा, कोई लौट आएगा, हालात बदलेंगे, जिंदगी फिर मुस्कुराएगी.
_ लेकिन जब बार-बार हमारी उम्मीदें खाली हाथ लौटती हैं, तो धीरे-धीरे मन किसी चीज़ की प्रतीक्षा करना छोड़ देता है.
_ फिर इंसान दुखी कम और उदासीन ज्यादा हो जाता है ; उसे खुशी की चाह भी डराने लगती है, क्योंकि वह जानता है कि हर उम्मीद के पीछे टूटने का एक डर छिपा है.
_ दिन गुजरते रहते हैं.
_ वही जिम्मेदारियाँ, वही भागदौड़, वही चेहरे और वही औपचारिक बातचीत.
_ हम हँसते हैं, दूसरों की बातें सुनते हैं, उनकी परेशानियों में उनका साथ देते हैं और फिर अपनी परेशानियों को लेकर चुपचाप घर लौट आते हैं.
_ अजीब बात है न—हम दूसरों के आँसू पहचान लेते हैं, लेकिन अपनी आँखों की नमी छुपाने में पूरी उम्र लगा देते हैं.
_ शायद इसलिए कि हमें बचपन से सिखाया गया कि मजबूत बनो, मगर किसी ने यह नहीं बताया कि मजबूत होने का मतलब हर दर्द को अकेले सहना नहीं होता.
_ सबसे मुश्किल वक्त अक्सर रात का होता है.
_ दिन के शोर में इंसान खुद से बचा रहता है, लेकिन रात जब कमरे की दीवारों पर सन्नाटा उतरता है, तब भीतर दबे हुए सारे सवाल जाग जाते हैं.
_ पुरानी बातें याद आती हैं, अधूरे रिश्ते सामने आ खड़े होते हैं, कुछ चेहरे बिना बुलाए आँखों में उतर आते हैं और मन पूछता है—आखिर इतना सब सहकर भी हम किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं ?
_ कितनी बार मन करता है कि किसी के सामने बैठकर सब कह दें, बिना कुछ छुपाए, बिना मजबूत बनने का अभिनय किए.
_ लेकिन फिर डर लगता है कि कहीं सामने वाला हमारी कहानी सुनकर भी हमें समझ न पाए और तब शब्द गले में ही रह जाते हैं.
_ धीरे-धीरे इंसान अपने दर्द के साथ समझौता करना सीख लेता है.
_ मुस्कुराना उसकी आदत बन जाता है, चुप रहना उसका स्वभाव और अकेले सह लेना उसकी मजबूरी.
_ बाहर से देखने वाले को लगता है कि वह बहुत संभला हुआ है, मगर भीतर वह हर दिन खुद को थोड़ा-थोड़ा समेट रहा होता है.
_ कभी-कभी तो ऐसा भी लगता है कि सुकून कोई बहुत बड़ी चीज़ नहीं, बस कुछ पल ऐसे मिल जाएँ जहाँ मन को किसी बात का जवाब न देना पड़े, किसी रिश्ते को निभाना न पड़े और किसी के सामने अपने ठीक होने का प्रमाण न देना पड़े.
_ फिर भी जिंदगी पूरी तरह बेरहम नहीं होती.
_ कभी किसी पुराने गीत की धुन अचानक भीतर का कोई बंद दरवाज़ा खोल देती है.
_ किसी किताब की एक पंक्ति अपनेपन का एहसास करा देती है.
_ किसी पुराने मित्र का संदेश, किसी अपने की छोटी-सी चिंता या खिड़की से आती सुबह की हल्की रोशनी यह याद दिला देती है कि जिंदगी में अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है.
_ शायद सुकून हमेशा बड़ी खुशियों में नहीं मिलता ; कभी-कभी वह उन छोटे-छोटे पलों में छिपा होता है, जिन्हें हम अपनी व्यस्त जिंदगी में देखने से चूक जाते हैं.
_ हम अक्सर सोचते हैं कि दर्द कभी खत्म नहीं होगा.
_ लेकिन शायद हर दर्द का खत्म होना जरूरी भी नहीं होता.
_ कुछ दर्द हमें बदलने आते हैं, कुछ हमें रिश्तों की कीमत समझाने, कुछ हमें अपने भीतर झाँकना सिखाने और कुछ हमें यह बताने कि हम जितना खुद को कमजोर समझते हैं, उससे कहीं ज्यादा सहने की क्षमता हमारे भीतर है.
_ वक्त हर घाव को मिटा दे, यह जरूरी नहीं ; मगर वह उसके साथ जीना जरूर सिखा देता है.
_ शायद जिंदगी का सच यही है कि हममें से कोई भी पूरी तरह बेदाग नहीं है.
_ हर किसी के भीतर कोई अधूरी कहानी है, कोई खोया हुआ रिश्ता है, कोई ऐसा वादा है जिसे निभाया नहीं जा सका, कोई ऐसा अपना है जिसे चाहकर भी रोक नहीं पाए और कोई ऐसा समय है जिसे चाहकर भी वापस नहीं ला सकते.
_ हम सब अपने-अपने हिस्से की खामोशी लिए इस दुनिया में चलते रहते हैं.
_ और शायद इसी का नाम जिंदगी है.
_ टूटकर भी बिखर न जाना, थककर भी अगली सुबह उठ जाना, आँखों में नमी होते हुए भी किसी और के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करना.
_ हम सब अपने भीतर कुछ ऐसा ढो रहे हैं, जिसका वजन दुनिया को दिखाई नहीं देता.
_ फिर भी कदम चलते रहते हैं, दिन गुजरते रहते हैं और उम्मीद की कोई बहुत छोटी-सी लौ कहीं भीतर जलती रहती है.
_ क्योंकि शायद जिंदगी का सबसे खूबसूरत सच यही है कि अँधेरा चाहे कितना भी लंबा क्यों न हो, मन के किसी कोने में सुबह के लौट आने की संभावना हमेशा बची रहती है.
_ बस हमें उस संभावना को पूरी तरह मरने नहीं देना चाहिए.
_ कभी-कभी खुद के लिए भी उतनी ही नरमी बचाकर रखनी चाहिए, जितनी हम दूसरों के दर्द के लिए रखते हैं.
_ हम सब अपने-अपने दर्द के साथ जी रहे हैं.. कोई उसे शब्द दे देता है, कोई आँसुओं में बहा देता है और कोई मुस्कुराकर छुपा लेता है.
_ मगर हर दिल के भीतर कहीं न कहीं एक छोटी-सी पुकार जरूर होती है.
_ कोई हमें भी समझ ले.. बिना कुछ पूछे, बिना कोई फैसला सुनाए.
_ शायद इंसान को हमेशा समाधान नहीं चाहिए होता, कभी-कभी उसे बस इतना चाहिए होता है कि कोई उसके पास बैठकर कह दे !
_ तुम्हें हर वक्त मजबूत बने रहने की जरूरत नहीं है.
– Ishq Banaras
_ उनके जीवन की कोई चमकदार तमन्ना नहीं होती। न किसी मंच की ख्वाहिश, न किसी ताली की चाह.
_ वे बस चाहते हैं कि उनके भीतर जो कोई अनकहा दर्द पल रहा है, वो किसी तरह कम हो जाए.
_ उनकी आँखों में कोई सपनों का समंदर नहीं, बस थोड़ा सा सुकून है जो हर रात की नींद से पहले खोजते हैं.
_ उन्हें दुनिया से बहुत नहीं चाहिए, बस मन का वह बोझ थोड़ा हल्का हो जाए जो हर सुबह उनके कंधों पर चुपचाप चढ़ जाता है बिना पूछे, बिना बताए.
_ कुछ लोग ऐसे होते हैं जो दूसरों की मुस्कान में अपने जीने का कारण ढूंढते हैं, पर खुद की मुस्कान कई बार भूल चुके होते हैं.
_ जिनकी आत्मा रोज़ किसी अनजाने अपराधबोध, किसी अधूरे रिश्ते, किसी भूले हुए वादे या खो चुके समय की टीस से बोझिल हो जाती है.
_ वे रोज मंदिर में नहीं जाते, लेकिन भीतर कोई प्रार्थना हर रात करवटें बदलती है कि एक दिन ऐसा आए जब उनकी आत्मा शांत हो जाए, कि कोई आँसू भीतर बहने से पहले ही किसी की हथेली में थम जाए, कि कोई चुप्पी बस एक बार समझ ली जाए बिना कहे.
_ वे लोग आखिरी विदा से नहीं डरते, बस यह चाहते हैं कि वह विदा सुकून में हो, शांति में हो, ऐसे कि नींद में कोई सोच न जागे, ऐसे कि मृत्यु से पहले जीवन कुछ हल्का लगे.
_ कई बार ऐसे लोग हमारे बहुत करीब होते हैं और हम उन्हें पहचान नहीं पाते, क्योंकि वे बोलते कम हैं, सहते ज़्यादा हैं. _ वे शोर नहीं करते, सिर्फ़ थक कर मुस्कुरा देते हैं.
_ और शायद इस समाज की सबसे बड़ी चूक यही है कि वह उन्हीं की ओर सबसे कम देखता है जो सबसे ज़्यादा थके हुए होते हैं.
– Ishq Banaras
_ क्योंकि औरों से मांगी हुई चीज़ कभी सुकून नहीं देती.!!
_ लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो टूटकर भी किसी को अपनी टूटन का एहसास नहीं होने देते.
_ वो शिकायत नहीं करते, हिसाब नहीं मांगते और न ही सामने वाले को उसकी गलती का एहसास कराने की कोशिश करते हैं.
_ बस धीरे-धीरे अपने भीतर से उस रिश्ते को समेटने लगते हैं, जिसे उन्होंने कभी पूरे मन से जिया था. _ उनकी सबसे बड़ी खूबी यही होती है कि चोट खाने के बाद भी उनके भीतर की अच्छाई खत्म नहीं होती.
_ वो वही नरमी रखते हैं, वही अपनापन रखते हैं और दूसरों के दर्द को समझते रहते हैं.
_ फर्क बस इतना आता है कि अब वो अपना दर्द हर किसी के सामने रखना बंद कर देते हैं. _ एक दिन आपको लगेगा कि सब पहले जैसा ही है.
_ वो बात करेंगे, मुस्कुराएंगे, आपकी मदद भी करेंगे.
_ लेकिन उनके भीतर कहीं एक दरवाज़ा बंद हो चुका होगा.
_ ऐसा दरवाज़ा जिसे उन्होंने गुस्से में नहीं, बार-बार निराश होने के बाद बंद किया होगा.
_ किसी अच्छे इंसान को खोना अक्सर किसी रिश्ते के खत्म होने जैसा नहीं दिखता.
_ वो बिना किसी आखिरी लड़ाई के दूर हो जाता है.
_ उसकी आवाज़ में नाराज़गी नहीं होती, बस पहले जैसी गर्माहट नहीं रहती.
_ उसकी मौजूदगी होती है, लेकिन उसमें पहले जैसा अपनापन नहीं होता.
_ और शायद सबसे गहरी बात यही है कि सच्चे दिल वाले लोग हमेशा आपको छोड़ना नहीं चाहते.
_ वो बहुत देर तक रिश्ते को बचाने की कोशिश करते हैं.
_ आपकी गलतियों को समझते हैं, आपकी मजबूरियों को जगह देते हैं और कई बार अपने हिस्से का दर्द भी खुद उठा लेते हैं.
_ लेकिन हर दिल की भी एक सीमा होती है.
_ जिस दिन उन्हें महसूस हो जाता है कि उनके होने और न होने से अब कोई फर्क नहीं पड़ता, उसी दिन वो भीतर से विदा लेना शुरू कर देते हैं. _ फिर उनका जाना अचानक नहीं होता.
_ वो तो बहुत पहले अपने मन में दूर हो चुके होते हैं, बस आपको पता देर से चलता है.
_ इसलिए किसी ऐसे इंसान को बार-बार मत आज़माइए, जो आपको पूरे दिल से अपना मानता है.
_ क्योंकि भरोसा कांच की तरह टूटकर हमेशा आवाज़ नहीं करता.
_ कभी-कभी वह बस इतना करता है कि इंसान आपके सामने खड़ा रहता है, लेकिन अपना दिल आपसे वापस ले लेता है.
_ और जब कोई सच्चा दिल अपना दरवाज़ा बंद कर लेता है, तो उसे खोलने के लिए पछतावा भी कई बार बहुत देर से आता है.!!
– Travel Point
_ असली बात ये होती है कि एक दिन वो चुप हो जाएगा.
_ वो आपको दोष नहीं देगा. सवाल नहीं करेगा. बदला लेने की कोशिश भी नहीं करेगा.
_ बस धीरे-धीरे अपने उस हिस्से को आपसे वापस ले लेगा, जो कभी पूरी तरह आपका हुआ करता था.
_ पहले आपके एक संदेश का इंतज़ार करने वाला इंसान, आपके जवाब का इंतज़ार करना छोड़ देगा.
_ आपकी छोटी-सी परेशानी पर बेचैन होने वाला इंसान, एक दिन आपकी परेशानियों से अनजान रहने लगेगा.
_ और सबसे अजीब बात… आपको पता भी नहीं चलेगा कि ये दूरी कब शुरू हुई.
_ क्योंकि अच्छे लोग अक्सर रिश्ते तोड़ते नहीं हैं… वे पहले उम्मीदें छोड़ते हैं.
_ वे कई बार खुद को समझाते हैं कि शायद सामने वाला बदल जाएगा.
_ शायद उसे अपनी गलती समझ आएगी.
_ शायद अगली बार वो उस दिल को नहीं दुखाएगा, जिसने हमेशा उसका साथ दिया.
_ लेकिन हर बार थोड़ा-थोड़ा टूटने के बाद एक दिन भीतर कुछ बिल्कुल शांत हो जाता है.
_ फिर शिकायत खत्म हो जाती है, इंतज़ार खत्म हो जाता है.
_ और वो इंसान, जो कभी आपको खोने के ख्याल से डरता था, आपको खोकर भी शांत रहने लगता है.
_ ये नफ़रत नहीं होती.
_ ये वो पल होता है जब इंसान समझ जाता है कि किसी को अपना समझना और किसी का आपके अपने होने की कद्र करना… दोनों अलग बातें हैं.
_ उसके बाद वो आपके खिलाफ कुछ नहीं करेगा.
_ शायद आज भी आपकी खुशी चाहेगा.
_ शायद मुश्किल वक्त में मदद भी कर दे. लेकिन उसके दिल में आपके लिए जो जगह कभी घर जैसी थी, वहां अब सिर्फ एक बंद दरवाज़ा होगा.
_ और सबसे दर्दनाक बात ?
_ उस दरवाज़े पर दस्तक देने के लिए शायद आप बहुत देर कर चुके होंगे.
_ क्योंकि कुछ दूरियां अचानक नहीं बनतीं, वो उन छोटी-छोटी चोटों से बनती हैं जिन्हें सामने वाला बार-बार अनदेखा करता रहा.
_ इसलिए अगर आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा इंसान है, जो आपकी गलतियों के बावजूद आपको समझता है, आपकी खामोशी पढ़ लेता है और बिना मांगे आपका साथ देता है… तो उसकी सहनशीलता को उसकी कमजोरी मत समझिए.
_ क्योंकि कुछ लोग जब चले जाते हैं, तो उनके जाने की आवाज़ नहीं होती.
_ बस एक दिन आपको एहसास होता है कि जिस इंसान को आप हमेशा अपने पास समझते थे, वो अब आपके पास होकर भी आपके जीवन में नहीं है.
_ और तब शायद पछतावा बहुत होगा… लेकिन वो दिल, जो कभी आपके लिए दरवाज़ा खोलकर बैठा था, शायद तब तक अंदर से हमेशा के लिए बंद हो चुका होगा.
_ सबसे मुश्किल बात ये नहीं होगी कि वो आपसे दूर हो गया, बल्कि ये होगी कि आप चाहकर भी उस पुराने रिश्ते को वापस नहीं ला पाएंगे.
_ क्योंकि कुछ रिश्ते टूटने के बाद खत्म नहीं होते… बस उनमें लौटने का रास्ता हमेशा के लिए खो जाता है.
– Travel Point
_ अगर हर चोट भर जाए, तो यादें भी धुंधली हो जाएँगी..
_ हरे ज़ख़्म ही तो वो निशान हैं.. जिनसे हम अपनी सच्चाई, अपने रिश्ते, और अपने एहसास पहचानते हैं….!
– जो आपको जानते तक नहीं.”