सुविचार 4765
अपनी उन्नति के लिए अधिक समय लगायेंगे तो दुसरो की आलोचना करने का समय नही मिलेगा.
क्यूँ न हम शीशे से कह दें…टूटा न करें !”
..यदि ना करो तो याद रखते हैं !
तुम पर नजर पड़ी और गुमराह हो गये..!!!
जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का..
_ बस जो अनावश्यक था, उसे गिरने दिया..- और उसी में हल्कापन मिला.”
_ जो छोड़ना सीख गया, वही नए साल को सच में जी पाता है.
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है..!!