सुविचार 2762

अहम का त्याग करके ही स्वयं को पहचाना जा सकता है.

यह एक गहनतम तथ्य है कि हम जीवन में जितना झुकेंगे उतने ही जीवंत हो सकेंगे.

रिश्तों में माधुर्य तभी रह सकता है जब हम अपने अहम को परे रख कर ग़लती  स्वीकारें और माफी माँगें.

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