मस्त विचार 4784

किसी को बांध कर रखना फितरत नहीं मेरी,

_ मैं स्नेह का धागा हूँ _ मजबूरी की जंजीर नहीं..!!

ज़िंदगी एक बेहद नाज़ुक धागे से बंधी है,
_इतना महीन कि अगली साँस भी उसकी मोहताज है.!!

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