आग़ाज़ रो कर और अंत सो कर होना तो तय है,
_ क्यों ना सफर थोड़ा हँस कर गुज़ार लिया जाए।।
ज़िन्दगी अपनी कहानी स्वयं लिखती है..
_ वो भी कागजो व प्लानिंग पर लिखी जाने वाली ज़िन्दगी से अलग.!!
_ क्यों ना सफर थोड़ा हँस कर गुज़ार लिया जाए।।
_ वो भी कागजो व प्लानिंग पर लिखी जाने वाली ज़िन्दगी से अलग.!!