जिन्दगी का सफ़र, हैं ये कैसा सफ़र
_ कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं
_ है ये कैसी डगर, चलते हैं सब मगर
_ कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं
_ जिन्दगी को बहोत प्यार हम ने किया
_ मौत से भी मोहब्बत निभायेंगे हम
_ रोते रोते जमाने में आये मगर
_ हंसते हंसते जमाने से जायेंगे हम
_ जायेंगे पर किधर, हैं किसे ये खबर
_ कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं
_ ऐसे जीवन भी हैं जो जिए ही नहीं
_ जिनको जीने से पहले ही मौत आ गयी
_ फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं
_ जिनको खिलने से पहले खिजा खा गयी
_ है परेशान नजर, थक गए चार अगर
_ कोई समझा नहीं, कोई जाना नही.!!
ये तस्वीर सिर्फ़ एक सफ़र नहीं, हौसले, जज़्बे और सपनों की कहानी है 
_ बारिश, ठंडी हवा और लंबा रास्ता… फिर भी चेहरे पर मुस्कान और दिल में जुनून 
_ क्योंकि असली खुशी मंज़िल में नहीं, हर मुश्किल को पार करते सफ़र में मिलती है 
_ आज की थकान, कल की सबसे बड़ी जीत बनेगी 
– Cycle Baba




