सुविचार – धूर्त, शरारती, शातिर, कपटी, धोखेबाज़, छल, छली, मक्कार – 193

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धूर्त व्यक्ति कई बार अपनी धूर्तता छिपाने के लिए लिबास और अल्फाजों का सहारा लेता है,

_ कोई आपको खूबसूरत/अतरंगे लिबास में दिखे या भारी-भरकम अल्फाजों के साथ मिले तो एक बार उस पर शक जरूर कीजियेगा.!!
धोखेबाज पहले लालच का जाल फैलाता है और फिर बात-बात पर कसम खाता है.!!
“छल और चालाकियाँ जीवन को रोचक बना सकती हैं, पर अर्थपूर्ण नहीं”
मासूमियत में हुई ‘भूल’ माफ हो जाती है,
_ पर साज़िश से किया गया ‘छल’ दिल पर गहरे घाव देता है.!!
अयोग्य और अकुशल लोगों के साथ रहना बेहतर है,
_ लेकिन धूर्त और बेहद मक्कार लोगों के साथ एक पल भी नहीं बिताना चाहिए.!!
जीवन मे छल करने वालों को कभी माफ नही करना चाहिए.

_ वो रोये, गिड़गिड़ाए, धमकाएं या लालच दें.
_ उन्हें बिल्कुल माफ नही करना चाहिए.
_ अगर, मगर, लेकिन, किन्तु, परन्तु से कोई मतलब नही.
_ मानवता सिर्फ श्रेष्ठ मानवों के लिए होती है, दो कौड़ी के लोगो के लिए नही.!!
अगर किसी ने आपके साथ छल किया, विश्वास तोड़ा, आपको गिराने की कोशिश की, आपका नुकसान किया, तो उसे माफ कर दीजिए.
_ लेकिन यह मत भूलिए कि उसने क्या किया था.
_ क्योंकि भूल जाने वाले लोग बार-बार धोखा खाते हैं.
_ आग से हाथ एक बार जल जाए तो हम आग से नफरत नहीं करते, लेकिन अगली बार सावधानी जरूर बरतते हैं.
_ उसी तरह जिसने आपको गिराया था, उससे नफरत मत रखिए,
_ लेकिन उसे फिर से अपने जीवन की चाबी मत दीजिए.
_ याद रखिएगा, अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता.
_ जीवन की सबसे महंगी फीस अनुभव ही तो है.
_ अगर आपने वह फीस दे दी है तो कम से कम उससे सीखा तो होना चाहिए.
– Sanjay Sinha

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