सुविचार 3140

जीवन को संयमित बनाने के लिए हमें अपने बाहरी और अंदरूनी दोनों तौर तरीकों पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
संयमित जीवन जीना कोई बुरी बात नही.

_ संयमित न रहने से जीवन में बिखराव आता है, बिखराव जीने के अंदाज़ में तेज़ी लाता है और हम जल्दी ही थक जाते हैं.
_ जीवन जीना भी एक कला है, जिस कला में संयम एक आवश्यक ingredient (अंग) है.
_ हर आदमी का एक ‘सोशल’ होता है और एक ‘प्राइवेट’, अपने ‘प्राइवेट’ में कोई जितना चाहे असंयमित हो ले, लेकिन ‘सोशल’ में उसका संयमित होकर चलना ही वांछनीय है.!!
– Manika Mohini

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