माहौल से ज्यादा व्यक्ति के भीतर ही बदलाव की जरुरत होती है.
हम हमेशा वह नहीं बदल सकते जो हमारे आसपास हो रहा है, लेकिन हम वह बदल सकते हैं जो हमारे भीतर होता है.
We can’t always change what’s happening around us, but we can change what happens within us.
हम जिस माहौल में रहते हैं, वह केवल हमें प्रभावित नहीं करता, बल्कि धीरे-धीरे हमें गढ़ता भी है.
_ “हम जिस वातावरण को रोज़ चुनते हैं, वही धीरे-धीरे हमारा स्वभाव बन जाता है”
_ जैसा माहौल और वातावरण हम अपने बाहर और अंदर खुद को देने लगते हैं..
_ वैसा ही असर हमारे शरीर और मन पर पड़ता है और एक्शन के रूप में प्रकट होने भी लगता है.!!



