जिन्हें किसी चीज का लालच नहीं होता…
_वो ज़िन्दगी में अपना काम बहुत जिम्मेदारी से करते हैं..!!
यूं ही तीन हिस्सों में दिन गुजर जाता है..
_ जरूरतें …जिम्मेदारियां… और ख्वाहिशें…!!
“सब कुछ मिल जायेगा.. तो तमन्ना किसकी करोगे ?
_ अधूरी ख्वाहिशें ही तो जीने का मज़ा देती हैं.!”
_ अधूरी ख्वाहिशें ही तो जीने का मज़ा देती हैं.!”
मुसीबतें और जिम्मेदारियां, उम्र नहीं पूछती..
_ वो सीधा इंसान को सिखा देती है ‘जीना कैसे है’
बहुत आसान है दूसरों पर उंगली उठाना, पर जब जिम्मेदारियां कंधों पर आती हैं ;
_ तब समझ आता है कि बातों से पेट नहीं भरता.!!
जरुरत आधारित ज़िन्दगी गुजारें, लालच आधारित नहीं.!!




