जिन्हें किसी चीज का लालच नहीं होता…
_वो ज़िन्दगी में अपना काम बहुत जिम्मेदारी से करते हैं..!!
यूं ही तीन हिस्सों में दिन गुजर जाता है..
_ जरूरतें …जिम्मेदारियां… और ख्वाहिशें…!!
“सब कुछ मिल जायेगा.. तो तमन्ना किसकी करोगे ?
_ अधूरी ख्वाहिशें ही तो जीने का मज़ा देती हैं.!”
_ अधूरी ख्वाहिशें ही तो जीने का मज़ा देती हैं.!”
मुसीबतें और जिम्मेदारियां, उम्र नहीं पूछती..
_ वो सीधा इंसान को सिखा देती है ‘जीना कैसे है’
बहुत आसान है दूसरों पर उंगली उठाना, पर जब जिम्मेदारियां कंधों पर आती हैं ;
_ तब समझ आता है कि बातों से पेट नहीं भरता.!!
जरुरत आधारित ज़िन्दगी गुजारें, लालच आधारित नहीं.!!
जीवन से संघर्ष कभी समाप्त नहीं होता..
_ एक दौर खत्म होता है, तो दूसरा सामने खड़ा मिल जाता है.
_ नई उम्मीदों और नई ज़िम्मेदारियों के साथ आप देते-देते थक सकते हो, पर लेने वालों की चाह अक्सर खत्म नहीं होती.
_ सच तो यह है कि जीवन में ऐसा कोई समय नहीं आता, जब संघर्ष और ज़िम्मेदारियाँ पूरी तरह से समाप्त हो जाएँ, वे बस रूप बदलती हैं,
_ और हमें हर बार थोड़ा और मजबूत बनाकर आगे बढ़ाती हैं..!
“जिंदगी को सिस्टम दे दो..
_ “जिस दिन आपने अपनी जिंदगी का सिस्टम बना लिया, उसी दिन जिम्मेदारियां बोझ नहीं रहेंगी”
_ “जिस दिन आपने अपनी जिंदगी का सिस्टम बना लिया, उसी दिन जिम्मेदारियां बोझ नहीं रहेंगी”
“थकान जिम्मेदारियों से नहीं, बिखरे हुए जीने से आती है…
_ जिंदगी को सिस्टम दे दो, खुशहाली अपने आप लौट आएगी.”






