सुविचार 4793

वैसे तो खुशी को परिभाषित करना बहुत ही मुश्किल है लेकिन हमारी खुशी हमारी सोच पर निर्भर करती है. हम शिकायत कर सकते हैं कि गुलाब की झाड़ियों में कांटे होते हैं या खुश हो कर कह सकते है कि कांटों की झाड़ियों में गुलाब होते हैं. हमें हमेशा सुखद और कर वंदनीय लगने वाली सोच के साथ चलते रहना चाहिए.

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