हर कोई दूसरे जैसा बनने के लिए बेताब है.
_ लोग न केवल अपने पहनावे, खान-पान, बैठने की आदतों, रूप-रंग में बल्कि खुशी, दुख, जीत और हार में भी दूसरों की नकल कर रहे हैं.
_ लोग प्रेरणा लेने के बजाय नकल करना पसंद करते हैं,
_ पर नक़ल करना आपको बेचैन बनाता है.. क्योंकि इसमें मौलिकता नहीं होती..
_ बल्कि एक झूठा डर रहता है कि नकल पकड़ी जा सकती है..
_ या कोई कह सकता है कि असल ज़्यादा बेहतर है..
_ कोई भी अपने जैसा नहीं बनना चाहता..
_ कोई भी खुद से प्रतिस्पर्धा नहीं करता…
_ कोई भी खुद से बेहतर बनने की कोशिश नहीं करता..!!





