“ज़िंदगी ही जब सबसे बड़ा अवसर है, तो हर दिन को खास मानकर जीना भी एक समझदारी है –
कल के लिए बचाया गया ‘आज’ अक्सर अधूरा रह जाता है.”
_ अक्सर हम जीवन को भविष्य के किसी “परफेक्ट दिन” के लिए रोक देते हैं,
और आज को बस रिहर्सल मानकर निकाल देते हैं.
_ अगर सच में मान लें कि ‘जिन्दा रहना ही सबसे बड़ा अवसर है, तो फिर –
अच्छे कपड़े “किसी दिन” नहीं, आज के लिए हैं,
पसंदीदा जूते किसी समारोह के लिए नहीं, आज की चाल के लिए हैं, महक किसी को दिखाने के लिए नहीं, खुद को महसूस कराने के लिए है.
_ हम चीज़ें बचाकर इसलिए रखते हैं.. क्योंकि भीतर कहीं डर होता है –
“कहीं ये पल ज़ाया न हो जाए”
_ पर सच्चाई उलटी है –
पल चीज़ों के लिए नहीं होते, चीज़ें पलों के लिए होती हैं.
_ जो जीवन को टालता है,
वह धीरे-धीरे खुद को भी टालने लगता है.
_ और एक दिन समझ आता है – हमने सब संभाल कर रखा था… सिर्फ़ जीना भूल गए थे.
_ आज अगर जी रहे हो, तो आज ही अवसर है.
_ बाकी सब सिर्फ़ तारीख़ें.!!