पहले दुःख भाँप लिया जाता था. अब दुःख मापा जाता है.
_ उसका दुःख कम मेरा दुःख ज़्यादा.
_ इस आधार पर लोगों ने दुःख सुनना और अपनी संवेदनाएँ देना तय कर लिया है.
_ सच कहूँ तो सुन कोई नहीं रहा होता है और झूठी संवेदनाएँ सबके पास है.
_ असल में दुःख बाँटने की अवधारणा इतनी खोखली है ये कोई जानना ही नहीं चाहता है.
_ अनसुने किए गये दुःख, और झूठी संवेदनाओं के इस दौर से ही दुःख का कारोबार अच्छा चल नहीं रहा.
_ दुःख बेच तो सब रहे हैं, पर दुःख इस बात का भी है कि ख़रीदार यहाँ कोई नहीं.
_ खुश दिखने वाले चेहरों का मोल है यहाँ बेशक़ीमती है.
_ दुःख से भरे चेहरों की क़ीमत कबाड़ी की दुकान में पड़े रद्दी से भी कम है.
_ वास्तविकता यही है, मुँह नहीं मोड़िए.