सुविचार – जितनी चादर हो, उतने पैर पसाराे – 320

एक कहावत है, जितनी चादर हो, उतने पैर पसाराे.

_ मेहनती लोगों ने अपनी चादर को बड़ा किया, ताकि वे खुल कर पैर पसार सकें.
_ इसी तरह महत्वाकांक्षी लोगों के लिए कहा जा सकता है कि महत्वाकांक्षा ज़रूर पालो, परन्तु अपनी सामर्थ्य देख कर.
_ समर्थ व्यक्ति की ही महत्वाकांक्षा पूरी होती है. _ अपनी सामर्थ्य पर ध्यान नहीं दिया तो जगत में उपहास का पात्र बनोगे.!!
– Manika Mohini
“चादर छोटी हो तो पैर समेटना बुद्धिमानी है ;

और अगर पैर फैलाने हों, तो पहले चादर बड़ी करना सीखो”

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