_ एक अकेली आत्मा जिसे यह नहीं पता कि सब कुछ कैसे ठीक किया जाए ;
_क्योंकि जहाँ भी आप देखते हैं, आप देखते हैं कि लोग आपको पीछे छोड़कर अपने जीवन में आगे बढ़ रहे हैं _ और आप स्वयं को फँसा हुआ महसूस करते हैं;
आप नहीं जानते कि जीवन नामक इस चीज़ से कैसे बाहर निकला जाए ;
_ और अब न तो तुम किसी से प्रेम करते हो, न तुम चाहते हो कि कोई आकर तुम्हें थामे.!!
_आप बस समय के साथ बेहतर होना चाहते हैं और समय आपकी सोच से भी तेज़ चलता है; आप वर्षों को महीनों में बिता देते हैं ;
_ आप लोगों को और खुद को यह समझाने की हर कोशिश करते हैं कि आपके अंदर क्या चल रहा है, _ लेकिन आप असफल होते हैं..!
— लेकिन इसे कैसे ठीक करें ? समाधान कहीं दिखाई या ज्ञात नहीं है ? क्योंकि कोई नहीं जानता, _क्योंकि हर कोई इसी दौर से गुजर रहा है…_ फिर भी, हम इसे ख़त्म नहीं करते;
हम इसके साथ रहते हैं, शिकायत करते हुए कि _कुछ भी बेहतर नहीं होने वाला है..!!
“_लेकिन सच तो यह है कि जब तक आप बेहतर बनने की कोशिश नहीं करेंगे, तब तक कुछ भी बेहतर नहीं होगा.”
_ इसलिए अपने आप से वादा करें कि आप अपने बारे में किसी भी तरह से कम नहीं सोचेंगे.!!
_यदि आप अकेले हैं, तो इसे स्वीकार करें और इस बात की चिंता किए बिना कि कोई आपको आंकेगा, वह सब कुछ करें _जो आप कर सकते हैं.!!
_वहाँ कोई नहीं है, जैसा कि आप पहले से ही जानते हैं, और कोई भी आपको बचाने नहीं आएगा..!!
__ “आप इस महासागर में अकेले हैं; यह आप पर निर्भर है कि आप डूबना चाहते हैं या तैरना..” – पंसद आपकी –




