सुविचार 5061

हर कोई दूसरे जैसा बनने के लिए बेताब है.

_ लोग न केवल अपने पहनावे, खान-पान, बैठने की आदतों, रूप-रंग में बल्कि खुशी, दुख, जीत और हार में भी दूसरों की नकल कर रहे हैं.

_ लोग प्रेरणा लेने के बजाय नकल करना पसंद करते हैं,

_ पर नक़ल करना आपको बेचैन बनाता है.. क्योंकि इसमें मौलिकता नहीं होती..

_ बल्कि एक झूठा डर रहता है कि नकल पकड़ी जा सकती है..

_ या कोई कह सकता है कि असल ज़्यादा बेहतर है..

_ कोई भी अपने जैसा नहीं बनना चाहता..

_ कोई भी खुद से प्रतिस्पर्धा नहीं करता…

_ कोई भी खुद से बेहतर बनने की कोशिश नहीं करता..!!

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