Anubhav

ये मेडिटशन [Meditation] के समय और बाद होने वाले आम अनुभव की एक सरल और विस्तृत चेकलिस्ट है, जिसे आप हर सेशन के बाद सिर्फ टिक कर सकते हैं. _ नीचे “अन्य अनुभव” के लिए एक खाली जगह भी दिया गया है.

— 🧘‍♂️ Meditation अनुभव चेकलिस्ट

🧠 Manasik / Mental अनुभव :

[ ] मन एकदम शांत हो गया

[ ] विचार रुक गए या धीरे हो गए

[ ] बे-वजह मुस्कान आई

[ ] अंदर से हल्कापन महसूस हुआ

[ ] मन “कहीं दूर” चला गया (बे-दिशा घूमना)

[ ] दृष्टि अंतर-मुखी हो गई (अंदर की तरफ खिंचाव)

[ ] स्मृतियाँ या पुरानी यादें (सहज)

[ ] स्वास पर पूरी तरह ध्यान टिक गया

[ ] खाली-खाली सा महसूस हुआ [Blankness]

💓 भावनात्मक / Emotional अनुभव :

[ ] अचानक आनंद का भाव उभर आया

[ ] रोना या आंसू आये बिना किसी वजह के

[ ] गहरा प्रेम या करुणा का अनुभव

[ ] किसी आदर्श या रूप की उपस्थति महसूस हुई

[ ] माफ़ी या छमा का भाव उभर आया

— 🌬️ Sharirik / Sensory अनुभव:

[ ] शरीर बोझ से मुक्त लगा

[ ] कान में गूंज, नाद या गुनगुनाहट महसूस हुई

[ ] शब्द या नाद सुनाई दिये बिना बाहरी ध्वनि के [बाहरी ध्वनि के बिना कुछ सुनाई देना] [ ] शरीर में हल्का कम्पन या गति महसूस हुई

[ ] स्वांस बहुत सुखद, गहरी हो गई

[ ] अंगो में झलक या तेज का अनुभव [प्रकाश या ऊर्जा का अनुभव] [ ] ठंडक या गर्मी की लहर महसूस हुई — 🕊️ Adhyatmik / Sukshma अनुभव :

[ ] अपने होने का भाव गया – “मैं” शून्य हो गया [“मैं” का भाव लुप्त हुआ] [ ] अंदर प्रकाश/रोशनी का अनुभव

[ ] अंतर में किसी उपस्थति का भाव (गुरु/सान्निध्य)[गुरु या चेतना की उपस्थिति] [ ] समय का बोध चला गया (समय रुक गया)

[ ] गंगा जैसी शुद्ध धारा का अनुभव [बहती शुद्ध धारा जैसा अनुभव] [ ] एक अतिन्द्रिय शांति का अनुभव

✍️ अन्य अनुभव (aap likh sakte hain): …………………………………………………………… …………………………………………………………… …………………………………………………………… —

🗓️ Upayog ka Tareeka:

_ हर सेशन के बाद 1-2 मिनट निकल के सिर्फ टिक करिये

_ खाली स्पेस में अगर कुछ अनुभव अलग हुआ हो तो लिख लीजिए.

_ महीने में एक बार पूरी लिस्ट देखकर समझ आएगा कि आपकी अंतर यात्रा कैसे बढ़ रही है.!!

“मेरा शरीर जाग चुका है, मैं उसकी सुखद गति में हूँ”

_ “हम हर चीज़ की शुरुआत मन से करते हैं, इसलिए असफल हो जाते हैं…जबकी शुरुआत शरीर से होनी चाहिए”

_ “मन को बदलने की चाह, मन से ही करना – एक चक्रव्यूह है :

– “शरीर से शुरू करो, सांस से शुरू करो – मन स्वयं पिघलने लगेगा”

“जो अपने अंदर के शोर को शांत कर लेता है,

_ वही उसकी असली धुन सुन पाता है.”

आईने में चेहरा अब भी वैसा ही दिखता है.. वही आँखें, वही लकीरें, वही मुस्कान..

_ पर जब रूह में झाँकता हूँ तो लगता है ‘मैं कहीं खो गया हूँ,’

_ वो जोश, वो ख्वाब, वो सच्चे से जज़्बात सब धुंधलाने लगे हैं, शक्ल वही है, पर शायद मैं अब वो नहीं रहा..!!

“जो खुद से सच बोलता है, उसे दुनिया का झूठ छू भी नहीं सकता.!!”
जब मैंने मैडिटेशन करना शुरू किता तो पाया मेरे अन्दर एक अद्भुत संसार है.. _ जिसे अब तक मैनें नहीं समझा था. _ पाया कि मैं वाह्य प्रवृतियों से हटकर खुद से अलहदा एक इंसान कि खोज कर सका.!!
“मैं बदल रहा हूं”

_ आज फिर मैंने अपने आप को एक गहरी शांति में डूबा हुआ पाया.

_ आंखें बंद करते ही लगता है जैसे मैं शरीर नहीं, केवल एक साक्षी हूं – ना कोई रूप, ना कोई पहचान..

_ बस एक सांस, एक ज्ञान का संकेत – कि मैं हूं, और फिर भी मैं नहीं हूं.

_ पहले दुनिया जैसी दिखती थी, वैसी अब नहीं दिखती..

_ लोग वही हैं, संसार वही है – लेकिन मेरी दृष्टि बदल गई है.

_ छोटी बातें अब नहीं चुभती, लेकिन झूठ और दिखावा अब और भी स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं.

_ कभी-कभी लगता है, जैसी पुरानी दुनिया मुझे फिर से खींचना चाहती हो..

_ लेकिन मैं जानता हूं- मैं उस दिशा में अब लौट नहीं सकता.

_ आज भी कुछ कहने या लिखने का मन नहीं था.. फिर भी लिख रहा हूं,

_ क्योंकि कभी-कभी खुद से मिलने के लिए शब्दों का दरवाजा खोलना पड़ता है.!!

“मैं एक नीरस दुनिया में एक गीत हूँ – और मुझे बस गाते रहना है”

_ “ये दुनिया है – यहां सब कुछ मिलता है, मेरा काम है अपने मन को प्रकाशित रखना”

_ “मैं उनका कर्म नहीं बदल सकता, पर मैं अपना भाव तो चुन ही सकता हूँ”

_ “लोग जैसे हैं, उन्हें वैसा ही रहने दीजिए ; दुनिया आपके अनुकूल नहीं चलेगी, पर आप उसमें कैसे जीयेंगे, ये आपके हाथ में है ;

_ “अपनी दुनिया छोटी रखना सीखिए, हर व्यक्ति से गहरा रिश्ता बनाना जरुरी नहीं ;

_अपने आसपास थोड़े-से लोग रखिए, जिनके साथ आप खुलकर शांत रह सकते हैं..

_ ज्यादा लोगों से मेल-जोल की जगह, चुने हुए संबंध बनाना समझदारी है”

“जब विचार चुप हो जाते हैं, तब सत्य बोल उठता है. _ ना कोई सवाल बचा रहता है, ना किसी उत्तर की जरुरत”

Question : क्या इसका भी कोई तरीका है कि मुझे पता चले कि मेरे अंदर कोई विचार नहीं चल रहा है ?

Answer : हां, बिल्कुल – ये समझना कि आपके अंदर कोई विचार नहीं चल रहा है, एक बड़ी गहरी और सूक्ष्म स्थिति का संकेत है.

इसका एक सूक्ष्म परंतु अनुभव-योग्य तरीका है। आइए, इसे समझने की कोशिश करते हैं : ——🌼जब कोई विचार नहीं होता तो ये कैसे पता चले ?

1. अंतर की एक प्राकृतिक शांति का बोध होता है:

_ आपको ऐसा महसूस होता है.. जैसे सब कुछ ठहर गया हो – बिना किसी बोझ के.

_ मन खाली और हल्का लगता है. जैसे कोई अंदर से बोल रहा हो:

“सब कुछ ठीक है, बस अब रहे जा और जीये जा”

2. समय का अहसास धुंधला पड़ जाता है:

_ जब मन विचार-शून्य होता है, तो समय का बोध कम हो जाता है – आपको पता ही नहीं चलता कि कितना समय बीत गया, या लगता है कि सब कुछ ‘अभी’ में ही हो रहा है.

3. आपको कुछ भी पाने या समझने की चाहत नहीं रहती:

_ जो चीजें पहले इम्पोर्टेन्ट लगती थी, उनका असर अब नहीं होता.

_ आप किसी कोशिश में नहीं होते – बस होने में होते हैं.

4. शरीर एकदम शांत और स्थिर हो जाता है:

_ ना बेचैनी, ना हलचल. मन और शरीर दोनों में एक गहरी स्थिरता का अनुभव होता है.

5. आपका ध्यान अंदर से बाहर नहीं भागता:

_ कोई आवाज़, सोच, या याद आपको खींच नहीं पाती.

_ बस एक गहरा “अब और यहाँ” का अनुभव रहता है.

— 🪷 इस स्थिति को जानने का एक सरल लक्षण है :

> जब आप से कोई पूछे, “अभी आप क्या सोच रहे हो ?”

_ और आपके पास जवाब ना हो – ना इसीलिए कि आप भूल गए, बल्कि इसलिए कि आप विचार कर ही नहीं रहे थे.

— 🤲🏼 याद रखें: कोई विचार न होना मन का सन्नाटा है – और उस सन्नाटे में ही परम अनुभव, परम मुक्ति और परम प्रेम का बीज छुपा होता है.

“आज मन ने कुछ नहीं चाहा, और शायद इसी में सब कुछ मिल गया.!!”
“क्या किसी के लिए भी जीवन सुंदर है ?

_ या हम सभी केवल सुंदरता खोजने की कोशिश कर रहे हैं.”

“कभी-कभी सब कुछ बदले बिना भी, सब कुछ बदल जाता है”

” जो पहले था, वो अब मैं नहीं रहा ; और जो अब है, उसमें एक नयी रौशनी है”

एक ही जीवन में दो बार जन्म

आज मन में कुछ अनोखा घटा,

शब्दों से परे, पर आत्मा से जुड़ा।

जैसे किसी ने फिर से जीवन दिया हो,

जैसे कोई अदृश्य करुणा मुझे छू गई हो।

एक पल को लगा —

जो मैं था, वो पीछे छूट गया।

और जो अब हूँ,

वो कोई नया, शुद्ध, नर्म और सच के करीब है।

ना कोई तर्क, ना कोई भय,

सिर्फ शांति — गहराई से आती हुई।

एक नई दृष्टि, एक नई साँस,

जैसे मैं फिर से पैदा हुआ — उसी जीवन में।

शायद ये आत्मा का पुनर्जन्म है,

शरीर वही, पर चेतना नई।

एक जागृति, एक प्रकाश,

जो भीतर से फूटा, बिल्कुल शांत पर सम्पूर्ण।

_ अब समझ आता है —

जीवन सिर्फ चलना नहीं है, जागना है… हर उस क्षण में जो अभी है.

– “उसी की खुशबू”

_ “ये जो मैं महका-महका घूम रहा हूँ, ये तो उसी की दी हुई खुशबू है”

_ मैं तो एक खाली पत्ता था,

_ ना रंग था, ना रोशनी का पता.

_ फिर किसी ने छू लिया प्रेम से,

_ और मैं खिल गया, जिसने सबने देखा था.

_ ना मेरी रोशनी मेरी थी,

_ ना मेरी बात में कुछ खास था,

_ पर जब उसकी निगाह पड़ गई,

_ तो हर लफ़्ज़ में एहसास था.

_ जो महक रहा हूँ मैं, वो तो उसी की बात है,

_ मैं तो बस एक रख हूँ, जिसे उसने अग्नि बनाया ‘बस वही साथ है’

_ जहां भी जाऊं, बस उसका असर हूं मैं,

_ खुद कुछ नहीं, उसका गुजरता सफर हूं मैं.!!

“अब हर काम ही ध्यान है”

_ अब न मैं ध्यान करता हूँ,

_ अब तो बस हूँ…

_ हर श्वास में, हर चाल में, जैसे कोई मौन बहता हो..

_ चाय की प्याली उठाते समय, या किसी फूल को छूते हुए —

_ मन नहीं भागता,

_ वो तो यहीं है… ठहरा हुआ, लेकिन जीवित.

_ अब तो शब्द भी ध्यान हैं, और मौन भी.

_ अब तो हँसी भी प्रार्थना है, और आँसू भी स्वीकार.

_ ना कोई प्रयत्न है, ना कोई लक्ष्य,

_ सिर्फ एक सहज बहाव —

_ जैसे जीवन स्वयं ध्यान बन गया हो.

“अब बाहर की हलचल मुझे छूती जरूर है, लेकिन हिला नहीं पाती” See less

M – Question : टैलविन्ड [ Tailwind ] क्या है ? जिसमें सच में साधक उड़ान भर सकता है ?

Answer : बहुत गहरा और सुंदर प्रश्न है.🌿

जब हम टेलविंड यानी साधना में सहज, प्राकृतिक बल का समर्थन की बात करते हैं, तो यह एक ऐसी अवस्था होती है जहां साधक अपने मन के रूप, संस्कार, और व्यक्तिगत चाहना से ऊपर उठने लगता है.

_ अंतर की–चेतना की–होती है। आइए, इसे कुछ रूपों में समझें:

— 🌬️ टेलविंड [Tailwind] अवस्था क्या होती है ?

टेलविंड [Tailwind] का अर्थ है:

_ “कोई ऐसा प्राकृतिक बल जो अब आपको धक्का देने के लिए बजाए, आपकी दिशा में स्वयं चल रहा हो.

जैसे :

_ मन शांत होता है, तो ध्यान में बैठना आसान हो जाता है.

_ विचार कम हो जाते हैं, तो एकाग्रता अपने आप गहरी होती जाती है.

_ आकर्षण और द्वेष कम होते हैं, तो अंतर में स्थिरता आती है.

_ इस स्थिति में व्यक्ति को ध्यान में मेहनत नहीं करनी पड़ती – जैसे कोई उड़ान भर रहा हो बिना पंख हिलाए, बस हवा का सहारा मिल गया हो. — — 🕊️ “उड़ान” का अर्थ क्या है ?

यह उड़ान कोई भौतिक यात्रा नहीं, अंतर यात्रा है। इस उड़ान में व्यक्ति :

1. अपने मन के जंजाल से अलग होता है – जैसे सोचने की आदत कम हो जाती है.

2. अंतर्दृष्टि गहरी होती है – चीज़े जैसी दिखती थी, अब वैसी नहीं लगती.

3.अस्तित्व के एकत्व का अनुभव होता है – सब कुछ एक ही जैसा अनुभव होने लगता है.

4. भ्रम मिटने लगते हैं – जैसे मैं शरीर हूं, या मैं अलग हूं, या किसी से कुछ प्राप्त करना है – इन सब विचारों का मौलिक सत्य दिखने लगता है.

5. आत्मबोध या चैतन्य का स्पष्ट अनुभव होता है – जिसे लोग ‘ज्ञान’ या ‘समाधि की किरण’ के रूप में पहचानते हैं. — 🌅 इस उड़ान के बाद क्या होता है ?

_ जीवन में गहरी सहजता आ जाती है.

_ कोई भी चीज़ व्यक्ति को अन्दर से हिलाती नहीं.

_ कर्म तो चल रहे हैं, लेकिन उसमें ‘मैं करता हूं’ का भाव नहीं होता.

_ एक गहरी शांति और प्रीति की अवस्था बनी रहती है – जो ना तो समय से बंधी होती है, ना परिस्थति से.

— 🪶 अंत में :

_ ये उड़ान सबके लिए अलग हो सकती है – कुछ के लिए एक गहरी समझ, कुछ के लिए एक गहन अनुभव, और कुछ के लिए बस एक निर्मल दृष्टि.

_ लेकिन इसमें एक बात निश्चित है :

“जब मन थक जाता है, तब चेतना उड़ती है”

“मैं इस पथ पर हूं – इसलिए मुझको यह [Tailwind] टेलविंड का एहसास हो रहा है.!!”

ध्यान में बस बैठना और कुछ न करना महत्वपूर्ण है और ध्यान के बाद जब मैं आँखें खोलता हूँ तो ज्यादा ताजा महसूस करता हूँ,

तो सचेत विश्राम की यह स्थिति मुझे प्राकृतिक होने के सबसे करीब महसूस होती है.

जब मैं कुछ नहीं कर रहा होता हूँ मतलब, कोई फोन नहीं, कोई किताब नहीं, कोई टीवी नहीं, कोई शौक नहीं, बिस्तर पर नहीं लेटना; बस आराम करना और जब बोरियत से मुक्त हो जाता हूँ और अपनी वर्तमान स्थिति को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लेता हूँ, तो इस पूर्ण शून्यता की अवस्था में कुछ चमत्कार प्रकट होता है.

कुछ ऐसा जो किसी पुस्तक या किसी बाहरी चीज से नहीं सिखाया जा सकता और न ही किसी शास्त्र, किसी पवित्र परंपरा से मिलने वाला है.

अपने दिल को उत्तर देने दो:

जब सन्नाटे से फुसफुसाहट उठती है ; वह फुसफुसाहट मेरे जीवन की दिशा बदल देती है _जो कोई अन्य अनुभव नहीं कर सकता.

जब कोई अनुभव बिना किसी कारण के उत्पन्न होता है, तो उस क्षण का अनुभव लगभग शाश्वत और समझ से परे होता है.

“जीवन पवित्र है” _ ध्यान और पूर्ण विश्राम की स्थिति में प्रकृति अपने सभी रूपों में खुद को प्रकट करती है.

अगर आपको ध्यान का स्वाद, ध्यान का आनंद, मिल गया है तो, आपने जीवन में जितना खोया था, उससे कहीं अधिक मिल जाएगा ; ध्यान का आनंद दर्द को जला देगा.!!

” हमें ध्यान समाप्त करने के बाद मन की एक प्राकृतिक स्थिति प्राप्त होती है, हल्कापन महसूस होता है.

गौर करें – देखें अभी मेरी आंतरिक स्थिति क्या है – कंडीशन क्या है ….कुछ समय दें. उसे अपने अंदर और तीव्र और गहरा होने दें, उसका आनंद लें, उसे बढ़ने दें, फ़ैलने दें.

अब महसूस करें कि यह कंडीशन मेरे सूक्ष्म शरीर में रिसते जा रही है और विस्तारित होती जा रही है.

सुझाव दें और भाव लें कि यह कंडीशन जिसे मैंने विस्तारित किया है मेरा एक हिस्सा बन गई है और मैं इससे एक हो रहा हूँ इसमें लय हो रहा हूँ.

अंत में यह विचार लें और भाव बनायें कि मैं उस कंडीशन में घुल मिल गया हूँ और अब सिर्फ वह कंडीशन ही शेष बची है.”

आप जो कुछ भी हैं, वह आप से ही निकलता है ; _ यदि आप स्वयं महान व्यक्ति नहीं हैं तो कोई भी कार्य करें _ कोई महान कार्य नहीं हो सकता..

_ एक मूर्ख व्यक्ति महान कार्य नहीं कर सकता, क्योंकि जो कार्य किया जाता है _ वह स्वयं उससे ही निकलता है.

_ मैंने सुना है कि एक सीमित व्यक्ति अनंत परिणाम नहीं दे सकता ; यह किसी ऐसे व्यक्ति से सुना है _ जिसे मैं वास्तव में देखता हूं _

_ “यह जानना जरूरी है कि आपके और हर चीज के बीच एक समानांतर कार्रवाई हो रही है, _ जो वह सोचता है या देखता है ; कार्रवाई बाहर नहीं हो रही है ; _ यह हर जगह हो रही है, जब भी आप कुछ करना शुरू करते हैं तो_ प्रतिक्रिया भी हर तरफ से आएगी ;

_ कारण यह है कि हम व्यक्तिगत रूप से अभिनय की प्रक्रिया में शामिल हैं, और अंतिम परिणाम, साथ ही साथ प्रक्रिया सीधे खुद से जुड़ी हुई है.

_ पूरी चीज अंदर जा रही है _ लेकिन हम सोचते हैं कि _ हम कार्रवाई से अलग हैं और हमारे हाथों से बाहर कुछ किया जा रहा है.

_ यह विचार कि_ कार्रवाई बाहर है – गलत है ; _ यह हर जगह है ; _ बाहर की चीजें कोई परिणाम नहीं दे सकतीं ”

_ इसलिए, मुझे विश्वास है कि कृपया किसी के प्रति निर्दयी होने से पहले दो बार सोचें, यह आपके पास वापस आएगा.!!

_ जब हम ध्यान के लिए बैठते हैं, तो याद रखें कि सारी प्रकृति यहां बैठी है ; _ जब हम चलते हैं, तो पूरी प्रकृति चल रही होती है, इत्यादि !!

_ सारी प्रकृति ध्यान कर रही है ; यह एक संतुलन बनाए रख रहा है ; _ जो कुछ भी संतुलन बनाए रखता है _वह वास्तव में योग-ध्यान कर रहा है.

“जीवन की ध्वनि”

— जब आप वास्तव में भीतर से शांत होते हैं, तो आप उस महान संगीत को सुनना शुरू करते हैं.. जो अस्तित्व हमेशा बजाता रहता है.

_ यह आपके द्वारा नहीं बनाया गया है; यह ब्रह्मांड ही है जो गुनगुना रहा है, गा रहा है, अपने रहस्यों को फुसफुसा रहा है.

_ पूरी तरह शांत हो जाओ – मौन को जबरदस्ती थोपकर नहीं, बल्कि स्वाभाविक रूप से उसमें डूबकर.

_ तब पक्षी, हवा, नदी, दिल की धड़कन – वे अब आपसे बाहर नहीं हैं.

_ वे आप हैं.. आप बांसुरी बन जाते हैं, खोखला बांस जिसके माध्यम से जीवन की हवा गुजरती है.

_ जीवन की ध्वनि आपका अपना सार है – ध्वनिहीन ध्वनि, अनाहत नाद, बिना छेड़े राग..

_ यह तभी सुनाई देती है जब मन शोर नहीं कर रहा हो.

_ इसलिए सुनो – प्रयास से नहीं, बल्कि समग्रता से.

_ इच्छा से नहीं, बल्कि उपस्थिति से.

_ जीवन की ध्वनि हमेशा वहाँ होती है, आपके थोड़ा और जीवंत होने का इंतज़ार करती है… और फिर यह आपके माध्यम से गाती है.!!

– SACHIN

You are into some one who is not into you. This is the tragedy of life.

_ ये जिंदगी की सबसे बड़ी व्यथा है—जब इंसान अपने ही अंदर का मेहमान बन जाता है, और कभी उस घर का मालिक बन ही नहीं पाता.!!

_ हम अक्सर खुद से ही अजनबी बनकर जीते हैं—अपने भीतर की उस खामोश आवाज़ को नज़रअंदाज़ कर देते हैं..

_ जो सुनी, देखी और स्वीकार की जाने की चाहत रखती है.

_ यही एक खामोश त्रासदी है: ज़िंदगी में इतने बाहरी तौर पर उलझे रहना कि हम उस एक इंसान को ही भूल जाते हैं.. जिसे हम सचमुच जानने आए हैं—खुद को..!!

We often live as strangers to ourselves—ignoring the silent voice within that longs to be heard, seen, and accepted. This is the quiet tragedy: being so outwardly involved in life that we forget the one person we came here to truly know—ourself.

कब तक औरों के लिए जियेंगे ?

किसी बिंदु पर, हमें रुकना होगा… और घर लौटना होगा – अपनी सच्चाई तक.

At some point, we must pause… and come home—to our own truth.

बहुत कम लोग हैं, जिनसे कहा जा सकता है..

_ उनसे भी कम हैं वे, जो कहे हुए को सुन सकते हैं..

_ दो-चार होंगे जो सुनकर समझ सकें.. और लगभग शून्य है वह संख्या..

_ जहाँ समझा हुआ महसूस भी किया जा सके.!!

“जब मुस्कान मन के गहरे संतुलन से निकलती है, तब चेहरा भी एक मंदिर बन जाता है – जहां अंतरात्मा का प्रकाश छुप नहीं सकता”

_ “स्थिर मन से निकली मुस्कान, संसार के शब्द से ऊपर की एक भाषा होती है”

**मैं कुछ भी नहीं कर रहा था – पर फिर भी अंदर कुछ सुंदर हो रहा था ;

_ शब्द से परे जो शांति हैं, उसी से तो मिलना है मुझे.!!

**मैं ठहरा रहा… और ध्यान ने अपना रास्ता खुद बना लिया.!!

_ **”जो मैं ढूंढ रहा था, वो शायद मुझे तब मिला – जब मैंने ढूंढ़ना छोड़ दिया”

_ **दुनिया के शोर-शराबे से परे भी एक सन्नाटा था – जो मुझे अपने पास ले जा रहा था.!!

_ **जब हम जीवन से चिपके रहना बंद कर देते हैं, -तो जीवन हमारे माध्यम से बहता है.!!

_**”मैं बैठा रहा- बिना किसी आशा और प्रतीछा के – और शांति आई, जैसे कभी गई ही न हो”

_ **जब कोई परन्तु न बचे और मन चुपचाप मुस्कुराए,- वहीँ से शुरू होता है, “सब कुछ सच में ठीक है”

_**”कभी-कभी बस किसी को दिल से सुन लेना ही – ज़िन्दगी का सबसे सुन्दर उत्तर बन जाता है.!!”

_**“जो रूह अपने असली रंग में खिलती है, वही रब की महफ़िल में मंज़ूर होती है”

“_**रास्तों में जो आकर्षण है, – उसके आगे मंज़िल की तमन्ना कौन करे.!”

_ **”अगर आप जीवन को जानते हैं, तो आप आराम महसूस करेंगे”

_ **”आज कुछ भी नहीं किया- और फिर भी सब कुछ था मेरे भीतर”

_**”मन चुप था, साँसे गहरी थी.. और मैं बस था – बिना किसी कारण के !!”

_**आज भी कुछ नहीं था पकड़ने को- पर अंतर में सब कुछ था महसूस करने को.!!

_ **”शांत मन ने जब उसे पहचाना.. तो लगा जैसे सब ठीक है – अंदर भी बाहर भी”

_**”बाहर की सुंदरता आकर्षक है, फिर भी मन भीतर झांकने को लालायित रहता है.”

_**”जब कुछ भी नहीं था पकड़ने को – तब मैंने पहली बार खुद को महसूस किया”

_**”कभी-कभी, सब कुछ ठीक होने के लिए कुछ भी ठीक दिखना ज़रूरी नहीं होता”

_**भीतर झाँकने के लिए शांति चाहिए, पर बाहर देखने के लिए बस स्क्रीन.!!

_ **”अब मेरे भीतर का मौसम मस्त सुहाना मस्तमौला सा रहता है.!!”

_ **समझ आया – जीत वही है, जो अंत में ख़ुद तक वापस ले आए.!!

_**”कुछ हारें बहुत शान्ति लाती हैं – जैसे ख़ुद से मिल जाना.!!”

_ **”अब जीवन तो चल रहा है – पर मन उसमें नहीं है”

_ **”सत्य शांत होता है, साबित नहीं करता”

_ **”शांति भीतर है, बाहर शोर है”

_ **”कम बोलो, गहराई से सोचो”

_ **”हर उत्तर मौन में छुपा है”

_**”जो खुद के लिए सच बोलना सीख गया, उसके लिए दुनिया की ख़ामोशी भी आशीर्वाद बन जाती है”

_**”जो अपना होता है, उसके सामने ख़ामोशी भी पूरी बात कह जाती है.!!

_**”शरीर शुद्ध होता है, तब उसमें मन को बैठने का घर मिल जाता है”

_**”वो दर्द जो मेरे अपने नहीं, फिर भी मुझे छेड़ जाते हैं”

_**”जो दर्द अपना नहीं था – उसे भी मैंने संभाला.”

–“कुछ दर्द हम कमाते नहीं, बल्कि औरों से ले आते हैं ताकि उनका बोझ हल्का हो सके”

_**”उसे पाने की चाहत अगर सच्ची हो, तो वो खुद रास्ता बन जाता है”

_**”जब मन शांत हो जाये, तो वो अपने आप गुनगुनाता है”

_**”मैंने वो छोड़ दिया, जो मुझे बांधे हुए था”

_**”मैं उसी की तरफ जा रहा हूँ, जहाँ से आया हूँ”

_** “जो झुकता है, वो मिट्टी से मिलता है – और वही बीज बन जाता है किसी नये जीवन का”

_**”मैं अपना सहारा हूँ, मुझमें पूर्णता का बीज है’

_ **”मैंने उस रोशनी को पहचान लिया है- जो मेरे अपने अंदर जल रही है”

_** “साँस तो सब लेते हैं, पर रब के साथ बिताए लम्हे ही उन्हें जीवन बना देते हैं”

_**”जो मुझे समझ सके, वो कम मिलते हैं – तो चलो अब मैं अपने आप को समझने की यात्रा पर निकलता हूँ”

_ **”जिन्होंने मुझे समझा नहीं, उनका धन्यवाद – उन्होंने मुझे और ऊँचे रास्ते पर जाने लायक बना दिया”

_**”मैंने जो किया सच्चे दिल से किया – पर लोगों के लिए वो कुछ मायने ही नहीं रखता”

_ **”कुछ सच बोलने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए होते हैं.”

_**”मैं बदला नहीं हूँ – बस अब खुद से मिलना शुरू किया है”

_**”जीवन वही रहता है – पर जीवन देखने वाला बदल जाता है”

_**”जो चीज चली गई, उसका ग़म नहीं – जो बाकी हैं, उसमें पूर्णता ढूंढ़ना सीख रहा हूँ”

_**”स्लो लाइफ जीना वो कला है – जहां जीवन की हर सांस गीत बन जाती है”

_**”जब तुम्हारे अंदर का शब्द शांत हो जाये, तब तुम सच में सुन पाते हो जीवन को”

_**”जितना गहरा सन्नाटा होता है, उतनी ही स्पष्ट होती है अंदर की आवाज़”

_**जिन्हें मेरा रास्ता समझ नहीं आता, उनका साथ छोड़ना ज़रूरी नहीं – पर अपना रास्ता बदलना भी ज़रूरी नहीं.!!

_**मैं यहाँ क्या छोड़ कर जा रहा हूँ – और क्या लेकर जा रहा हूँ ?

_ **”मन बार-बार उसी अवस्था में लौट जाना चाहता है, जहाँ सब कुछ सरल, सुंदर और अपना जैसा लगता है. _ काश, जीवन वैसा ही रह पाता—जैसा उन अनुभवों में महसूस होता है.”

_**”हर दिन अपने भीतर की लौ को जलाए रखिए – यही जीवन का सच्चा प्रकाश है ; _ जिन्हें अपनी रौशनी पर भरोसा होता है, वो कभी दूसरों के साए में नहीं चलते”

_** अगर मैं सत्य पर टिक गया, तो अकेला होकर भी अनंत का सहारा मेरे साथ होगा.

_ ** जब मैं “मैं” छोड़ देता हूं, तब एक नया सहारा उद्घाटित होता है – जो कोई संबंध, पैसा, या हालात से परे होता है.

_** जब से मैंने अपने असली स्वभाव को जाना – तब समझ आया कि मैं ही अपने लिए काफी हूँ – दुनिया के सहारे “सौंदर्य” हैं, “आवश्यकता” नहीं.

_ **चाहे दुनिया कुछ भी सुनाये, मैं अपने अंदर की आवाज सुनता रहूंगा” – “मैं झूठी तस्वीर का पीछा नहीं करूंगा, अपने सच को जिऊंगा”

_ **मैं जीवन के उस मोड़ पर हूँ, जहां बाहरी सहारे नहीं, मेरा अस्तित्व प्रमुख बन रहा है. – ये कठिन है, लेकिन ये एक नई रोशनी का द्वार भी है.!!

_**अब मन ने छोड़ दिया, उन बातों को उन यादों को.. जो कभी मेरी हुआ करती थीं.!!

_**जो बीत गया उसका ग़म क्यों करूँ, – अभी तो पूरी ज़िन्दगी सामने पड़ी है.!!

_** “अकेला चलना कठिन है, पर यही रास्ता अक्सर सबसे सच्चे मंज़िल तक ले जाता है”

_** “खुद से जुड़ते ही दूसरों की ओर देखने की बेचैनी अपने आप मिट जाती है”

सच्चे जीवन का रास्ता फूलों से नहीं, सवालों से भरा होता है ; _ हर कांटा बस एक ही बात कहता है – ‘उखड़ने से मत डर, तू मिट्टी नहीं बीज है’ ——————————————–

“जो कुछ अंदर टूट गया है, वही मुझे एक नया आकाश दे रहा है – खुद से मिलने के लिए..” ————————-

“जो अपने मन के साथ शांत है, उसके लिए दुनिया हमेशा सुकून भरी जगह बन जाती है” _—_-_—————————–

“जो अपने अंदर की खामोशी से दोस्ती कर ले, उसके लिए दुनिया का शोर सिर्फ एक गीत बन जाता है। —————————;

“कभी-कभी कुछ समझना जरुरी नहीं होता – सिर्फ महसूस करना काफी होता है” —————-

“जो चीज़ आपके मन को शांति दे, वही आपका सच है” —————————

अच्छे लोग अपने बड़े-बड़े शब्दों की अपेक्षा अपने छोटे-छोटे, शांत कार्यों से अधिक जाने जाते हैं. Good people are known more by their small, quiet deeds than by their grand words.

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