सुविचार 4834
ज़िद, गुस्सा, गलती, लालच और अपमान खर्राटों की तरह होते हैं,
जो दूसरा करे, तो चुभते हैं, परन्तु स्वयं करें तो एहसास तक नहीं होता..
जो दूसरा करे, तो चुभते हैं, परन्तु स्वयं करें तो एहसास तक नहीं होता..
इसलिए सफर जारी रखिए..!!
इसके बीच में मैं जितना हो सके स्वयं को व्यस्त रखता हूं.”
यही परेशानीयों की खास वज़ह भी है “
सोच शुभ है तो, शुभता -फलित होती है, यही असली बात है,”