सुविचार 4230

परिवर्तन के बीच व्यवस्था और व्यवस्था के बीच परिवर्तन को बनाये रखना ही प्रगति की कला है.
यदि आप आज अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं देंगे तो ..आपका कल बेहतर नहीं हो सकता !!

सुविचार 4229

‘ जो पुरुषार्थ नहीं करते ‘ उन्हें धन, मित्र, ऐश्वर्य, सुख, स्वास्थ्य, शांति और संतोष प्राप्त नहीं होते.
पुरुषार्थी लोग दूसरों की संपत्ति की परवाह नहीं करते, अपने बाहुबल का भरोसा रखते हैं.

सुविचार 4228

जैसे सोना अग्नि में चमकता है, वैसे ही धैर्यवान आपदा में दमकता है !

सुविचार 4227

बन सहारा बे सहारों के लिए, बन किनारा बे किनारों के लिए.

जो जिए अपने लिए तो क्या जिए, जी सको तो जिओ हजारों के लिए.

सुविचार 4226

गिरकर उठना उठकर चलना यह कर्म है संसार का..

कर्मवीर को फर्क नहीं पड़ता किसी जीत या हार का..

सुविचार 4225

दिन ब दिन गिर रहा है ” इन्सानियत ” का स्तर… और इन्सान का दावा है कि हम तरक्की पर हैं..!!
दुनिया में तरक्की इतनी हुई कि हज़ारों किलोमीटर दूर बैठे इंसान को देख और सुन सकते हैं ..

_ “पतन’ इतना हुआ की पास बैठे इंसान का दुःख-दर्द, तकलीफ तक दिखाई नहीं देता है.!!

“उन्नति अगर अलगाव पैदा कर दे, अपनों में दूरी भर दे.. तो फिर वह उन्नति है भी या अंधी दौड़ ?
तरक्की व्यस्तता पर नहीं, बल्कि व्यवस्थित काम पर निर्भर करती है !!
आपकी तरक्की और उन्नति से जलेंगे, वो आपको कई मिलेंगे.!!
जब लोग किसी की तरक्की नहीं रोक पाते.. तो वह उसकी छवि बिगाड़ने लगते हैं.!!
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