सुविचार 4746
किसी भी व्यक्ति की सहनशीलता, एक खींचे हुए रबड़ की तरह होती है,
एक सीमा से ज्यादा खींचे जाने पर उसका टूटना तय है..
एक सीमा से ज्यादा खींचे जाने पर उसका टूटना तय है..
लेकिन सत्य को जीने वाले सत्य को जीते भी हैं, जानते भी हैं।
सत्य को जानो मत, जियो।
हमारी अज्ञानता ही हमारे दुःख का कारण है.
आज से हम चुनौतियों में भी शांत रहें और अनोखे हल निकालें…
उसी तरह मुसीबत कितनी भी बड़ी हो, शांति से विचार करने पर जीवन में झटके नहीं लगते ” चलते रहिए ” !!