सुविचार 3880

सिर्फ दरवाज़ों पर शुभ- लाभ लिखने से कुछ नहीं होगा !

शुभ विचार रखिए, अपने लिये भी और दूसरों के लिये भी, लाभ ही लाभ होगा..

सुविचार 3878

सहजता ही सबसे बड़ी सभ्यता है.

जो शिष्ट नहीं है, वह कभी विशिष्ट नहीं बन सकता.

सुविचार 3877

निर्णय क्रोध में लिया गया हो या फिर भावनाओं में बह कर ;

अंततः दोनों ही पछतावे का कारण बनते हैं.

सुलझा हुआ मनुष्य वह है जो अपने निर्णय स्वयं करता है,

और उन निर्णयों के परिणाम के लिए किसी दूसरे को दोष नहीं देता..!

जब किसी को आपकी ज़रूरत हो और फुर्सत हो तो ‘आप ही आप’..

न हों तो करो माफ़…वाली policy चलती है.. __आपकी भावनाओं की कोई कद्र नहीं..

सुविचार 3876

हाथ उसका पकड़ो जिसे सुख में आप ना छोड़ो

और दुःख में वो आपको ना छोड़े.

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