सुविचार 3783
लोगों की निंदा से, कभी भी अपना रास्ता मत बदलना ;
क्योंकि, सफ़लता शर्म से नहीं, साहस से ही मिलेगी.
क्योंकि, सफ़लता शर्म से नहीं, साहस से ही मिलेगी.
जिसे चीख़ चीख़ कर दुख बताना पड़ता है…
We have a double-standard mind: for us we think in one way, for others in a totally different way.
दूसरों के हाथों की कठपुतली बन कर रह जाओगे.
_तब तक कभी भी अपना हाथ न बढ़ाएं.”